सांस्कृतिक योद्धा पुरस्कार से नवाजे गए प्रदीप भंडारी; सुशांत सिंह राजपूत के मौत का मामला और बॉलीवुड में ड्रग के खिलाफ सबसे पहले उठाई थी आवाज

14 जून 2020 को देश के उभरते हुए फ़िल्म स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई थी। पहले दिन से ही महाराष्ट्र पुलिस और तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत के मौत को आत्महत्या साबित करने में लग गई थी। उस समय सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमार्टम पर भी कई सवाल उठे थे।

जन की बात के फाउंडर प्रदीप भंडारी उस समय रिपब्लिक न्यूज़ नेटवर्क में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जुड़े हुए थे। उन्होंने पहले दिन से ही कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि एक मर्डर है। मगर उस समय तमाम लिबरल लोगों ने आत्महत्या मान लिया था। मगर प्रदीप भंडारी लगातर आवाज उठाते रहें और उसके बाद सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने पटना में सुशांत सिंह राजपूत के मर्डर होने का FIR कराया।

पटना पुलिस जब अपनी जांच करने मुंबई आई थी तो उस समय मुंबई पुलिस ने पटना पुलिस को जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं किया था और इस मुद्दे को भी पटना पुलिस ने जोरदार तरीक़े से उठाया था और ये प्रदीप भंडारी के ही मुहिम का असर था कि कई लोग और उनके इस मुहिम से जुड़ते गए। सुशांत सिंह राजपूत का केस CBI को दिए जाने में भी प्रदीप भंडारी के मुहिम का काफी बड़ा असर रहा है।

राष्ट्रवादी पत्रकार प्रदीप भंडारी के इस मुहिम में कई बाधाएं आई, कई लोगों ने उनको डिगाने की कोशिश की मगर प्रदीप भंडारी डटे रहे और आज भी प्रदीप भंडारी लगातार इस मुहिम से जुड़े हुए हैं और इसका प्रमाण के है कि प्रदीप भंडारी को ही सुशांत सिंह राजपूत की बहन प्रियंका सिंह ने सबसे पहले अपना इंटरव्यू दिया था।

प्रदीप भंडारी के मुहिम का ही असर था कि बॉलीवुड में ड्रग माफियाओं का भंडाफोड़ हुआ। प्रदीप भंडारी ने लगातार बॉलीवुड में ड्रग कल्चर पर बात की और इसी मुहिम के कारण NCB ने जांच शुरू की और रिया चक्रवर्ती और उसके भाई को जेल जाना पड़ा था।

आज जन की बात के फाउंडर प्रदीप भंडारी को “सेव कल्चर, सेव इंडिया फाउंडेशन” द्वारा सांस्कृतिक योद्धा पुरस्कार से नवाजा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनको यह अवार्ड दिया है। प्रदीप भंडारी को ये पुरस्कार सुशांत सिंह राजपूत के मौत के मामले में बेबाक रिपोर्टिंग और बॉलीवुड में ड्रग कल्चर के खिलाफ आवाज उठाने के लिए दिया गया है।

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