Voice Of The People

गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि को भी पद्म श्री सम्मान, ‘भगवा आतंक’ की झूठी थ्योरी का कर चुके हैं खुलासा

केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि को भी सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की है। आरवीएस मणि को सिविल सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है। वह एक प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी, विद्वान और शिक्षाविद रहे है। मणि ने दावा किया था कि 2009 में तत्कालीन संप्रग सरकार के दौरान ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने के लिए उन्हें दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था। आरवीएस मणि ने अपनी किताब, ‘हिंदू टेरर इनसाइडर अकाउंट आफ मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स 2006-2010’ में आरोप लगाया है कि 2009 में गृह मंत्रालय में राजनीतिक नेतृत्व ने उन पर ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने वाले दूसरे हलफनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला था।

आरवीएस मणि ने दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह को जेल भेजने की साजिश रची गई थी। मणि के अनुसार, उन्होंने जो हलफनामा साइन किया था, उसमें खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट शामिल थी, जिसमें इशरत जहां को लश्कर‑ए‑तैयबा से जुड़ा बताया गया था। उनका कहना है कि इशरत जहां और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों का उद्देश्य तत्कालीन गुजरात सरकार के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना था।

उन्होंने ‘डिसेप्शन ए फैमिली दैट डिसीव्ड द होल नेशन ‘भगवा आतंक एक षड्यंत्र’ और दलाल जैसी किताबें भी लिखी हैं। आरवीएस मणि ने यह भी कहा कि अहमदाबाद के पास हुई घटना को गलत तरीके से एनकाउंटर बताया गया, जबकि वह एक क्रॉस‑फायर की स्थिति थी, जिसमें पहले गोली दूसरी ओर से चलाई गई थी। उनके अनुसार, इशरत जहां के साथ मौजूद दो अन्य व्यक्ति अवैध रूप से पाकिस्तान से भारत आए थे, लेकिन तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक कारणों से उसे निर्दोष और “बिहार की बेटी” बताने की कोशिश की। मणि ने उस समय के सीबीआई निदेशक के एक कथित बयान का ज़िक्र करते हुए कहा कि “काली दाढ़ी” और “सफेद दाढ़ी” को जेल भेजने की बात कही गई थी। उनका दावा है कि यह इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की ओर था।

आरवीएस मणि ने तथाकथित “भगवा आतंकवाद” की अवधारणा को भी खारिज करते हुए इसे एक सोची‑समझी राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि मक्का मस्जिद धमाके के मामले में असली आरोपियों को बचाकर निर्दोष लोगों को फंसाया गया, जिन्हें बाद में 2018 में क्लीन चिट मिली। मालेगांव विस्फोट मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस केस में भी साध्वी प्रज्ञा और एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को जानबूझकर फंसाया गया।

Must Read

Latest