भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक है। इससे ऊर्जा आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने पहले से ही कई वैकल्पिक स्रोत तैयार कर रखे हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत का कुल आयल इंपोर्ट कई देशों से होता है। रशिया और वेनेज़ुएला से भी तेल की आपूर्ति जारी है। देश के पास तेल की कोई कमी नहीं है।
US-इजरायल-ईरान संघर्ष से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई असर नहीं है। विभिन्न देशों से भारत में तेल आयात की निरंतरता बनी हुई है। एक तरफ रूस कह रहा है कि हम भारत को निर्बाध तेल सप्लाई जारी रखेंगे, अमेरिका कह रहा है कि भारत के रूस से तेल खरीदने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है तो वहीं दूसरी तरफ ईरान कह रहा है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर भारत की वेसल को कोई खतरा नहीं।
भारत दुनिया के 40 देशों से तेल खरीदता है, जिसमें 40% स्टेट ऑफ़ होर्मुज के रास्ते से और 60% अन्य सोर्सेज से आता है। वर्तमान में देश के पास 50 दिन का एडवांस तेल भंडार है। जबकि देश का तेल आयात निरंतर जारी है।
भारत कोई कमजोर देश नहीं है जो फेक प्रोपेगैंडा की वजह से खत्म हो जाएगा। असलियत यह है कि भारत के पास 250 मिलियन बैरल से ज़्यादा क्रूड ऑयल और रिफाइंड फ्यूल का स्टॉक है, जो स्ट्रेटेजिक रिज़र्व, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, टर्मिनल और पहले से ही ट्रांजिट में मौजूद जहाजों में फैला हुआ 7-8 हफ़्ते का फुल सप्लाई बफर है। भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी 258 MMTPA है, जो असल में हमारे टोटल डोमेस्टिक कंजम्प्शन से ज़्यादा है। आसान शब्दों में कहें तो, भारत के पास सप्लाई को स्टेबल रखने के लिए फ्यूल रिज़र्व और रिफाइनिंग कैपेसिटी दोनों हैं।
यह याद रखें: पिछले 12 सालों में एक भी पेट्रोल पंप खाली नहीं हुआ है। यह PM मोदी की तैयारी और गवर्नेंस है। यह भी याद रखें कि पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें लगातार चार साल से नहीं बढ़ी हैं, क्योंकि प्राथमिकता साफ़ है: हर भारतीय परिवार के लिए किफ़ायत, उपलब्धता और स्थिरता। और सबसे ज़रूरी बात, यह 2014 से पहले का भारत नहीं है। यह नया भारत है। इसलिए सिर्फ़ सस्ते राजनीतिक पॉइंट पाने के लिए जनता को गुमराह करना और पैनिक फैलाना बंद करें। भारत की एनर्जी सिक्योरिटी प्लानिंग, डाइवर्सिफ़िकेशन और मज़बूत गवर्नेंस पर चलती है, न कि कांग्रेसियों, उनके चमचों और सोशल-मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ बनाने वालों के प्रोपेगैंडा पर।
