प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से बिगड़े हालात को लेकर राज्यसभा में संबोधित किया। इसमें पीएम मोदी ने ऊर्जा संकट को लेकर सरकार की तैयारी, जंग से विश्व में खराब होती परिस्थितियों और इसको लेकर भारत के स्टैंड के बारे में बताया। पीएम मोदी ने कहा कि मिडिल-ईस्ट का युद्ध पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। इसकी वजह से पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। हम युद्ध से प्रभावित सभी देशों के अलावा ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा मकसद, डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए इलाके में शांति की बहाली का है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से हमने दो राउंड की बातचीत की है। Hormuz Strait से जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है। Hormuz Strait दुनिया के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत आने वाले तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई बनी रहे। हॉर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के तमाम जहाज फंसे हैं। उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारत के क्रू मेंबर्स हैं। ये भी भारत के लिए बड़ी चिंता का मुद्दा है। ऐसी कठिन परिस्थिति में जरूरी है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।”
पीएम मोदी बोले कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुए 3 सप्ताह से ज्यादा का समय हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस जंग ने दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है और भारत के लिए भी यह हालात चिंताजनक है। पीएम मोदी ने कहा कि जंग ने हमारे व्यापार मार्गों को भी प्रभावित किया है और इसके चलते पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की नियमित सप्लाई बाधित हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनकी जिंदगी और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं राज्यसभा के सदस्यों और देश को आश्वासन देता हूं कि हमारे देश के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज और निरंतर सप्लाई के इंतजाम हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर अधिक निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस की सप्लाई में LPG के अलावा PNG पर भी जोर दे रही है। साथ ही राज्य सरकारों से अपील करना चाहता हूं कि प्रवासी मजदूरों का खास ख्याल रखा जाए। संकट के समय में सबसे ज्यादा वे ही प्रभावित होते हैं। योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचना चाहिए।
