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नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार के मंगलौर बूचड़खाने में ईद पर क़ुर्बानी की परमीशन दी

उत्तराखंड के नैनीताल उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले के मंगलौर कस्बे में स्थित एक बूचड़खाने में ईद-उल-अधा के लिए जानवरों के वध की अनुमति दी, दरअसल, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना पर रोक लगाते हुए ये आदेश दिया जिसमें पूरे हरिद्वार जिले को ‘पशु-वध-मुक्त क्षेत्र’ के रूप में घोषित किया था ।

मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने आदेश दिया कि ईद अल-अधा ( बकरीद) के दौरान, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से बनाए गए मंगलौर नगरपालिका के कानूनी रूप से अनुपालन कर रहे बूचड़खाने में जानवरों का वध किया जा सकता है और नगरपालिका से अदालत के फैसले को लागू करने के लिए कहा है । उन्होंने उस याचिकाकर्ता को भी आदेश दिया, जिसने सरकार के इस फैसले को चुनौती दी थी कि यह गारंटी दी जाए कि जिले में कहीं और कोई जानवरों की क़ुर्बानी न हो।

3 मार्च 2021 को, उत्तराखंड राज्य सरकार ने हरिद्वार जिले के शहरी स्थानीय निकायों को जिसमें दो नगर निगम, दो नगर पालिका और पांच नगर पंचायतों को ‘बूचड़खाने मुक्त क्षेत्रों’ के रूप में घोषित किया था , और बूचड़खानों को संचालित करने के लिए जारी किए गए परमिटों को समाप्त कर दिया था। ये नोटिफिकेशन पिछले साल हरिद्वार मे आयोजित हुए कुंभ मेले से पहले शहरी विकास विभाग की ओर से जारी किया गया था। इससे पहले, क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि ‘हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर’ में बूचड़खानों को प्रतिबंधित किया जाए।

हरिद्वार निवासी फैसल हुसैन ने नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया कि इस्लाम में पशु वध एक आवश्यक धार्मिक प्रथा है और ईद अल-अधा ( बकरीद) त्योहार के लिए पशुओं की कुर्बानी के लिए इजाजत दी जाए , पिछले साल मंगलौर मे बनाए गए बूचड़खाने में पशु वध की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन जिले में पूर्ण प्रतिबंध के कारण बूचडखाना पूरी तरह से बंद पडा है।

फैसल हुसैन ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि मंगलौर नगर पालिका की 87.45 प्रतिशत आबादी मुसलमान निवास करती हैं। मंगलौर कस्बे की दूरी हरिद्वार शहर से लगभग 45 किलोमीटर है, और अगर मंगलौर के एक बूचड़खाने में पशु वध की अनुमति दी जाती है, तो हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार करते हुए ईद-उल-अधा ( बकरीद ) पर पशुओं की कुर्बानी देने के लिए बूचडखाने को शुरू करने का आदेश जारी किया है। इसमे देखने वाली बात होगी राज्य सरकार का इस आदेश के बाद अगला कदम क्या होगा व इस आदेश का पालन कराने के लिए क्या कदम उठाती हैं !

 

 

 

 

 

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Anup Kumar
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