बीजेपी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है। पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में नितिन नबीन ने खुद को एक साधारण कार्यकर्ता बताया और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने राजनीति को भोग के बजाय त्याग और तपस्या का मार्ग बताया।
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन ने अपने पहले संबोधन में कहा, “आज सबसे पहले मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। आपने मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को पार्टी के इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अवसर दिया है और इसके लिए मैं आप सभी को नमन करता हूं। प्रधानमंत्री जी मैं आपका भी हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, क्योंकि हम जैसे साधारण कार्यकर्ताओं ने हमेशा दूर से देखा है कि आप राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।”
नितिन नबीन ने गुजरात के आनंद में सद्भावना मिशन कार्यक्रम का जिक्र करते हुए बताया, “मुझे याद है जब मैंने पहली बार गुजरात के आनंद में आपके साथ एक कार्यक्रम में भाग लिया था। उस समय मैं राष्ट्रीय महासचिव था और मैंने सद्भावना मिशन कार्यक्रम के दौरान आपको प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यान से सुनते हुए देखा था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, जब आपने अपने ग्रीन रूम में हमसे बात की तो आपने बड़ी भावुकता से समझाया कि गुजरात से इतने सारे लोग क्यों आए थे। उस दिन मुझे समझ आया कि एक व्यक्ति तभी महान बनता है जब वह जनता की भावनाओं से जुड़ता है।”
नितिन नबीन ने सभी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को करते हुए कहा, “मैं सभी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को हार्दिक बधाई देता हूं और पार्टी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। 2006 में जब मैं पहली बार विधायक बना, तब से देख रहा हूं कि राजनाथ सिंह जी ने हर कार्यकर्ता से कैसे जुड़ने का प्रयास किया। नितिन गडकरी जी ने संगठन के हर मोर्चे को गढ़ा और अमित शाह जी ने हर कार्यकर्ता की चिंता की।”
नितिन नबीन ने अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र किया और कहा, “जब प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद 370 खत्म किया तो कश्मीर का माहौल बदल गया और आज कश्मीर के हर कोने में तिरंगा शान से लहरा रहा है। यदि आज भाजपा विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनी है तो इसकी वजह हमारा प्रेरणादायी नेतृत्व, हमारी विचारधारा और कार्यकर्ताओं की मेहनत है। वो कार्यकर्ता जो अनवरत काम करता है जो कठिन परिस्थितियों में भी भारत का झंड़ा झुकने नहीं देता जो सीना ठोककर कहता है- तेरा वैभव अमर रहे मां।”
