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इंडिया-EU फ्री ट्रेड डील से क्या होगा फायदा? जानें

पीएम मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16वें इंडिया-ईयू समिट में इंडिया-यूरोपियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India–EU FTA) के संपन्न होने की संयुक्त घोषणा की। यह घोषणा भारत-यूरोपीय संघ के आर्थिक संबंधों और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ व्यापारिक जुड़ाव को लेकर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।

भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा यूरोपीय संघ के दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने से यह ग्लोबल जीडीपी (सकल घेरलू उत्पाद) का 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई है। भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में तरजीही प्रवेश मिलेगा, जिससे वृद्धि की अपार संभावनाएं खुलती हैं। खास कर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए नए अवसर खुलेंगे और महिलाओं, कारीगरों, युवाओं एवं पेशेवरों के लिए रोजगार सृजित होंगे। कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत तरजीही पहुंच से भारी लाभ होने की उम्मीद है।

इससे न केवल यूरोपीय संघ के मोटर वाहन विनिर्माताओं को भारत में उच्च मूल्य श्रेणियों में अपने मॉडल पेश करने की अनुमति मिलेगी बल्कि भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ और भारत से निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी। यूरोपीय संघ में पारस्परिक बाजार पहुंच से भारत में बने मोटर वाहनों के लिए भी अवसर खुलेंगे। भारतीय उपभोक्ताओं को एडवांस टेक्नोलॉजी वाले उत्पादों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा।

भारत ने यूरोपीय संघ के उन देशों में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को स्वदेशी लाइसेंस के तहत काम करने की अनुमति सुनिश्चित की है, जहां पारंपरिक चिकित्सकीय पद्धतियों का विनियमन नहीं है। इससे यूरोपीय संघ से भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी सेवाएं और निवेश आएगा, जिसके परिणामस्वरूप पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था बनेगी।

भारत को यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों जैसे आईटी/आईटीईएस, बिजनेस सर्विस और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच हासिल होगी। बाजार तक निश्चित पहुंच, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार, डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना और सुगम आवागमन भारत के सेवा निर्यात को बढ़ावा देगा।

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