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सभी समीकरणों को पीछे छोड़, कैसे अव्वल साबित हुए शशि थरूर

इमरान खान, जन की बात-
जहां देश के पॉलिटिकल पंडितों ने 2019 लोकसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट का आकलन करते हुए शशि थरूर को हराया था। उस भविष्यवाणी को ध्वस्त करते हुए शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में तीसरी बार कांग्रेस का परचम फहराया ।

2014 लोकसभा चुनाव में भी ओ. राजागोपाल से चुनावी घमासान में शशि थरूर विजयी हुए थे। 2014 लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर केवल 15,470 रहा था। ओ राजगोपाल केरल राज्य में बीजेपी के इकलौते विधायक हैं।

कैसे बीजेपी की रणनीति हुई केरल में फेल”

तिरुवनंतपुरम 67 % हिन्दू आबादी वाला संसदीय क्षेत्र जहां बीजेपी का मानना था कि वह इस लोकसभा सीट से केरल की राजनीति में आगमन कर सकती है। कुम्मनम राजशेखरन केरल में बीजेपी के सबसे मजबूत नेताओं में से एक जो कि आरएसएस से आते है और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल भी रहे हैं। कुम्मनम राजशेखरन तिरुवनंतपुरम में काफी प्रसिद्ध नेता हैं। राजशेखरन नायर समुदाय से आते है।

बीजेपी को लगा कि वह सबरीमाला मुद्दे के बाद तिरुवनंतपुरम में नायर वोट को अपनी तरफ कर लेगी। जो कि तिरुवनंतपुरम में 17% की आबादी में हैं। लेकिन बीजेपी नायर वोट में सेंध लगाने में सफल नहीं रह पाई| बीजेपी नेम्म विधानसभा में ही आगे रह पायी। केवल एक विधानसभा जो बीजेपी के खाते में है।

कज़हाकुट्टम , वट्टियूरकॉव और तिरुवनंतपुरम ये वह विधानसभा हैं, जहाँ पर बीजेपी को लगता था कि वह शशि थरूर को पछाड़ सकती है। आखिर समय में जनता का भरोसा अपने पुराने सांसद शशि थरूर पर ही दिखा।

तो वहीं कोवलम, नेय्याट्टिनकरा और परसाला विधानसभा जो कि शुरू से ही शशि थरूर का गढ़ माना जाता है, वह उनके पास ही रहीं। जिसके कारण 2019 लोकसभा का वोट मार्जिन 1.5% से बढ़कर 10% हो गया। अल्पसंख्यक वोट जिन्हें तिरुवनंतपुरम में शशि थरूर का मजबूत वोट माना जाता है।

बीजेपी को लगा कि वह इस वोट बैंक में कुम्मनम राजशेखरन की छवि के दम पर सेंध लगा पाएगी। परंतु यह केवल ख्याली पुलाव बनकर ही रह गया। जिसके कारण 2019 लोकसभा चुनाव में शशि थरूर ने तीसरी बार जीत दर्ज की। इसी जीत के बाद शशि थरूर ने बोला कि “मैं एक ओपनिंग बैट्समैन हूं, जिसने एक बार फिर सेंचुरी बनाई परंतु टीम हार गई।”

2019 लोकसभा चुनाव में शशि थरूर को 4,16,131 (41%) बीजेपी के उम्मीदवार कुम्मनम राजशेखरन को 3,16,142 (31%) वोट के साथ दूसरे स्थान मिला। वहीं सीपीआई के उम्मीदवार सी. दिवाकरण को 2,58,556 (25%) वोट शेयर के साथ तीसरा स्थान मिला।

बीजेपी केरल में 4-5 सीटों का दावा कर रही थी, तो वह क्या केवल नायर वोट के दम पर यह बात कर रही थी या फिर बीजेपी का कोई और गेम प्लान है! क्योंकि बीजेपी का केरल की हर लोकसभा सीट पर वोट शेयर बढ़ा है। अब इस बढ़े हुए वोट शेयर के साथ बीजेपी आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कैसे इस वोट शेयर को सीट में बदलेगी, यह समय की गोद में छुपा है।

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