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जानिए क्या है बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक संस्थान पतंजलि की कोरोना वायरस से लड़ने वाली दवा। 

अमन वर्मा (जन की बात)

बाबा रामदेव की कंज्यूमर गुड्स और हर्बल दवा कंपनी पतंजलि आयुर्वेद आज हरिद्वार में कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज करने के लिए अपनी आयुर्वेदिक दवा “कोरोनिल” को लॉन्च किया।

पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने कल यानी सोमवार को ट्वीट किया जिसमें लिखा था #SWASARI_VATI #CORONIL  कोरोना के लिए पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण आधारित आयुर्वेदिक दवा है। जिसका लॉन्च पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से कल दोपहर 12 बजे किया जाएगा।”

पतंजलि ने कहा है कि इस दावा को बनाने और शोध करने का काम पतंजलि अनुसंधान संस्थान (PRI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS), जयपुर की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था।  उत्पाद का निर्माण पतंजलि की दिव्य फार्मेसी द्वारा किया गया है।

चिकित्सा का शुभारंभ करते हुए, रामदेव ने कहा, “पूरी दुनिया कोरोना वायरस के लिए एक दवा विकसित करने के लिए इंतजार कर रही है। आज, हमें गर्व है कि हमने कोरोना वायरस के लिए पहली आयुर्वेदिक दवा विकसित की है। इसे कोरोनिल नाम दिया गया है।”

आपको बता दें इस महीने की शुरुआत में, आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया था कि पतंजलि द्वारा विकसित आयुर्वेदिक दवा 5-14 दिनों के भीतर कम से कम 1,000 कोरोनो वायरस रोगियों को ठीक करने में सक्षम है।

इलाज के पीछे की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि ने वैज्ञानिकों की एक टीम नियुक्त की थी। ये टीम तब से काम कर रही जबसे दुनिया को पता चला कि ये घातक वायरस चीन के बाहर फैलना शुरू हो गया है।  उन्होंने कहा, “सबसे पहले, इस रोग से लड़ने में कारगर औषधि और जड़ी बूटिया हैं उनकी पहचान की गई। फिर हमने सैकड़ों सकारात्मक रोगियों पर क्लीनिकल स्टडी कर अध्ययन किया और हमें 100 प्रतिशत अनुकूल परिणाम मिले हैं”। आपको बता दें कि कोरोनिल में मुख्य रूप से गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, और स्वसिर रस का इस्तेमाल किया गया है।

इस बीच, कई अन्य दवाएं भी कोरोना वायरस रोगियों के इलाज के लिए भारत और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेची जा रही हैं।  वास्तव में इनमें से कुछ फार्मास्युटिकल फर्मों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मंजूरी मिल गई है।

उदाहरण के लिए, डेक्सामेथासोन ड्रग जो ब्रिटिश नैदानिक ​​परीक्षणों में पाया गया था कि गंभीर रूप से बीमार कोरोना वायरस रोगियों के इलाज के लिए  डब्ल्यूएचओ का समर्थन प्राप्त है।  ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक दल के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने 2,000 से अधिक गंभीर रूप से बीमार कोरोनावायरस रोगियों को डेक्सामेथासोन दिया।  यह पाया गया कि दवा से मृत्यु दर में 35 फीसदी की कमी आई है।

गिलियड साइंसेज द्वारा विकसित रेमेडिसविर नामक एक अन्य दवा को हाल ही में कोविड ​​-19 के इलाज के लिए अनुमति दी गई थी।

इसके अलावा, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स के एंटीवायरल का नाम फैबिफ्लू है, जो कोरोनो वायरस रोगियों के इलाज के लिए बाजार में नवीनतम प्रोडक्ट क तौर पर उतारा गया है।

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