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इलेक्टोरल बॉन्ड्स नकदी भरे सूटकेस से काफी बेहतर था, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले बीजेपी उपाध्यक्ष जय पांडा

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक बताया है और इस पॉलिसी को रद्द कर दिया है। कोर्ट का कहना था कि चुनाव बॉन्ड की योजना सूचना के अधिकार (RTI) के खिलाफ है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वो 2019 से अब तक की जानकारी तलब करे। बॉन्ड जारी करने वाले एसबीआई को यह जानकारी देनी होगी कि अप्रैल 2019 से लेकर अब तक कितने लोगों ने कितने-कितने रुपए के चुनावी बॉन्ड खरीदे। इसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने ट्वीट कर इलेक्टोरल बॉन्ड्स के फायदे बताए हैं।

जय पांडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “इलेक्टोरल बॉन्ड्स नकदी से कहीं बेहतर थे। वे सूटकेस दागदार थे। हमेशा कर-चोरी से और अक्सर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से जुड़े होते थे। बांड ने वैधता के मुद्दे को संबोधित किया (सभी दानकर्ता नियामक जांच के उच्च स्तर के तहत पंजीकृत संस्थाएं हैं) जबकि ट्रैसेबिलिटी के और भी ऊंचे स्तर की चाहत वांछनीय हो सकती है।”

जय पांडा ने आगे लिखा, “दानकर्ता कंजूसी कर रहे थे, जिससे यह अव्यवहारिक हो गया। बांड पर डेटा व्यापक रूप से प्रदर्शित करता है कि किसी भी पार्टी को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा है। खासकर उन लोगों को जिन्होंने सार्वजनिक समर्थन में भारी कमी देखी है। संपूर्ण व्यक्ति अच्छे का दुश्मन बन गया है और बच्चे को नहाने के पानी के साथ बाहर फेंक दिया गया है।हमें विचार करना चाहिए। क्या सूटकेस के युग में बांड अस्तित्व में आने से पहले नागरिकों का सूचना का अधिकार किसी तरह बेहतर था? क्या सूटकेस-दर-सूटकेस शासन के साथ व्यवस्था से स्वाभाविक रूप से समझौता नहीं किया गया था?”

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