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कश्मीरी हिन्दू नरसंहार: कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करने वाला आतंकी बिट्टा कराटे कौन है?

हिमानी जोशी, जन की बात

एक फिल्म ने 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को फिर से सार्वजनिक बहस में ला दिया है। कश्मीरी पंडितों को पाकिस्तान और उसके संगठनों के आदेश पर आतंकवादियों द्वारा हिंदू होने के कारण मार दिया गया था। उन्हें “रालिव, गैलिव या चालिव” (कन्वर्ट, डाई या लीव) के बीच चयन करने के लिए कहा गया था। सैकड़ों लोग मारे गए और लाखों लोग कश्मीर घाटी से भाग गए।

एक फारूक अहमद डार था, जिसे बिट्टा कराटे के नाम से भी जाना जाता है। वह सालों से आजाद है और कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं का नेतृत्व करने वाले संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का मुखिया है।

कौन है बिट्टा कराटे उर्फ फारूक अहमद डार

जिस बिट्टा कराटे की चर्चा हो रही है असल में उसका नाम फारुक अहमद डार है। इसके बचपन का नाम बिट्टा है। और ये बचपन से ही कराटे सीखता था और इसमें माहिर हो गया। इसलिए लोग उसे बिट्टा कराटे कहने लगे थे। बिट्टा कराटे JKLF यानी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का आतंकी रहा है। बाद में बिट्टा कराटे की चर्चा अलगाववादी नेता के रूप में होने लगी थी। अलगाववादी नेता यासीन मलिक की तरह ही बिट्टा कराटे हत्याएं करने के बाद कहता था कि अब बातचीत के जरिए कश्मीर समस्या का हल निकाला जाए। लेकिन भले ही वो बाद में बातचीत के जरिए कश्मीर समस्या का हल निकालने की बात करने लगा था पर पहले वो खूंखार आतंकी बन चुका था। ऐसा करने के लिए बाकायदा उसने पाकिस्तान में 32 दिनों की ट्रेनिंग ली थी।

क्या हुआ था 19 जनवरी 1990 की सर्द सुबह को

दिन था 19 जनवरी 1990 उस दिन कश्मीर की मस्जिदों में सुबह-सुबह अज़ान के साथ कुछ और नारे भी लगाए जाते थे, और यह धमकियां उन्हें कुछ महीनों पहले से लगातार मिल रही थी। यहां क्‍या चलेगा, निजाम-ए-मुस्तफा’, ‘कश्‍मीर में अगर रहना है, अल्‍लाहू अकबर कहना है’ और ‘असि गछि पाकिस्तान, बटव रोअस त बटनेव सान’ मतलब हमें पाकिस्‍तान चाहिए और हिंदू औरतें भी मगर अपने मर्दों के बिना। यह संदेश था कश्‍मीर में रहने वाले हिन्दुओं के लिए। हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला जा रहा था। 19 जनवरी 1990 की रात हजारों कश्मीरी पंडितों का कत्ल कर दिया गया था. उन्हें घर-बार छोड़ने पर मजबूर किया गया था. ये एक नरसंहार था जिसे अंग्रेजी में होलोकास्ट (नरसंहार) कहते हैं. इस नरसंहार को अंजाम देने वालों में से कुछ लोग आज भी खुली हवा में सांस ले रहे हैं.

वो रात बड़ी भारी गुजरी, सामान बांधते-बांधते। पुश्‍तैनी घरों को छोड़कर कश्‍मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन का फैसला किया। कश्मीरी पंडितों के दो सबसे बड़े हत्यारों का नाम है- यासीन मलिक और बिट्टा कराटे, जिसे लोग फारूख अहमद डार के नाम से भी जानते हैं.  ये दोनों अलगाववादी नेता हैं और प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (Jammu Kashmir Liberation Front) से जुड़े रहे हैं. कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में इन दोनों का सबसे बड़ा हाथ था.

खुद कबूली थी हत्या की बात

बिट्टा कराटे (Bitta Karate) ने कैमरे पर 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूली थी। उसने दावा किया था कि उसका निशाना कभी नहीं चूकता था। अब अपने टारगेट के सिर या दिल में ही गोली मारता था। उसने बताया था कि सबसे पहले उसने सतीश कुमार टिक्कू को मारा था क्योंकि वह आरएसएस से जुड़े थे। इस इंटरव्यू के दौरान ही बिट्टा ने कहा था कि उसे मारने के ऑर्डर ऊपर से मिलते थे। साथ ही बताया था कि वह पिस्टल से हत्या करता था। एके-47 के इस्तेमाल को लेकर पूछे जाने पर कहा था कि इससे जवानों पर फायरिंग करता था।

जून 1990 में सबसे पहले किया गया गिरफ्तार

बिट्टा को सबसे पहले जून 1990 में गिरफ्तार किया गया था वो 2006 तक यानी 16 साल जेल में रहा. साल 2006 में उसे जमानत मिलने के दौरान टाडा कोर्ट के जस्टिस एनडी वानी ने कहा, ‘अदालत इस तथ्य से अवगत है कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं जिसमें मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है लेकिन एक तथ्य ये भी है कि अभियोजन पक्ष ने मामले में सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा’.

जेल से छूटने के बाद बिट्टा जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) में शामिल हुआ. वहीं पुलवामा हमले के बाद बिट्टा को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए टेरर फंडिंग के आरोप में 2019 में एनआईए (NIA) ने गिरफ्तार किया था.

फिल्म द कश्मीर फाइल्स के बाद #HangBittaKarate मुहिम की शुरुआत हुई

कश्मीरी पंडितों के दर्द को दिखाती विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के रिलीज के बाद जन की बात के संस्थापक और जनता का मुकदमा शो के होस्ट प्रदीप भंडारी ने 14 मार्च, 2022 को इंडिया न्यूज़ पर अपने शो जनता का मुकदमा पर #HangBittaKarate अभियान की शुरुआत की थी. इसके बाद 24 मार्च को कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के 31 साल बाद एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सतीश टीकू  के परिवार द्वारा न्याय की गुहार लगाई । एनआईए से जांच कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव पिटिशन दायर की गई। फिर परिवार की अर्जी पर श्रीनगर की अदालत पर 30 मार्च  को सुनवाई हुई। अब इस मामले में 16 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के बाद संसद में भी पहुंच गया हैI आज ( 7 अप्रैल) भाजपा सांसद सुशील मोदी ने राज्य सभा में हमारे अभियान #HangBittaKarate की मांग उठाई।

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