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कोरोना की वजह से छुट्टी पर बच्चों का लॉक डाउन पर विचार

नितेश दूबे, जन की बात

विश्व भर में कोरोनावायरस का कोहराम मचा हुआ है। इसका असर भारत में भी है और भारत में 1400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना के चलते देशव्यापी 21 दिनों का लॉक डाउन है जो कि 14 अप्रैल तक है। इस दौरान सभी चीजें बंद कर दी गई हैं और इसका असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर भी पड़ा है। स्कूल, कॉलेज ,कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं सभी को 14 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। ऐसे ही हमने कुछ कॉलेज स्टूडेंट से बात की और पूछा कि लॉक डाउन का उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ा है और उनका लॉक डाउन कैसा चल रहा है। 

कैरियर पर असर तो पड़ा है

देश के प्रतिष्ठित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में थर्ड ईयर में पढ़ने वाले छात्र हर्ष बताते हैं कि लोग डाउन का उनका कैरियर पर असर तो पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उनकी कक्षाएं – परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं और कब चालू होगी इसका कुछ पता नहीं है। पढ़ाई इसी वर्ष की होगी या फिर चौथे ईयर में डायरेक्ट प्रवेश मिलेगा इसका भी अभी तक कुछ पता नहीं है।

वहीं पर इलाहाबाद के एविंग क्रिश्चियन कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहे हैं छात्र वैभव सिंह बताते हैं कि इस लॉक डाउन का असर कैरियर और पढ़ाई पर तो पड़ा है। लेकिन मजबूरी भी है कि जान है तो जहान है, अगर जान नहीं रहेगा तो कैरियर कहा रहेगा। 

नई किताबें पढ़ रहे

इस दौरान हमने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी बात की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के भारती कॉलेज की दीक्षा बताती हैं लॉक डाउन के समय हमें एक दूसरे को सपोर्ट करने की जरूरत है, टाइम को यूटिलाइज करने की जरूरत है। वहीं पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के भारती कॉलेज की ही किरण शर्मा जो कि पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हैं। उनका कहना है कि लॉक डाउन के टाइम को यूटिलाइज कर रही हैं और नोबल और नए-नए किताबें पढ़ रही और कुकिंग भी सीख रही हैं। वहीं पर किरण शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन क्लासेस चल रही है और उसका फायदा हो रहा है।

वहीं पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के ओपन लरनिंग छात्र सुजीत कुमार बताते हैं कि लॉक डाउन के वक्त कई सारे छात्र अपना समय बर्बाद कर रहे है। लेकिन सभी को किताब को पढ़ना चाहिए और वह स्वंय भी ऐसा ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा इस समय का लाभ लेना चाहिए।

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