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ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र आसान नहीं रहने वाला है।: प्रदीप भंडारी का विश्लेषण

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जन की बात के संस्थापक और सीईओ प्रदीप भंडारी इस वक्त अपनी पूरी टीम के साथ बंगाल के दौरे पर है और वहां पर चुनावी विश्लेषण कर रहे हैं। इसी दौरान जन की बात के फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी पहुंचे ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में, जहां पर उन्होंने यह जानने की कोशिश की, कि ममता बनर्जी की उनके ही विधानसभा क्षेत्र में क्या स्थिति है? इसके बाद प्रदीप भंडारी ने जो बातें बताई वह काफी चौंकाने वाली हैं।प्रदीप भंडारी ने कहा कि भवानीपुर की अगर हम बात करें तो 2011 और 2016 में ममता बनर्जी यहां पर बड़े मार्जिन से जीती थी लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी महज़ 3000 वोटों से आगे थी। इसके साथ ही वह जहां पर खड़े थे वहां पर उन्होंने दिखाया कि इस गली में टीएमसी के झंडे लगे हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक बारीक चीज दिखाई जो था कि कुछ घर के दरवाजों पर लोटस फूल के निशान थे और यह सिर्फ एक, दो घर नहीं बल्कि कई घरों पर थे।प्रदीप भंडारी ने कहा कि ममता बनर्जी को कहीं ना कहीं चिंता है और इसीलिए उन्होंने कहा कि मैं नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ना चाहती हूं और मैं भवानीपुर से भी चुनाव लड़ सकती हूं।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि जब मैं नंदीग्राम में था तो वहां पर टीएमसी और बीजेपी दोनों पार्टियों के झंडे दिखाई देते थे, बराबर झंडे लगे हुए थे। लेकिन भवानीपुर में ऐसा नहीं है। यहां पर आप बीजेपी के झंडे को कुछ जगहों पर ही देखेंगे। लेकिन जब यहां पर पतली गलियों में आप घूमेंगे ,अकेले खड़े हुए व्यक्तियों से बात करेंगे तो आपको यहां परिस्थिति अलग नजर आएगी और पता चलेगा कि भवानीपुर ममता बनर्जी के लिए इस बार आसान नहीं रहने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा बंगाल में बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है। साथ ही साथ राजनीतिक पार्टियां इसका राजनीतिकरण भी करती हैं। ममता बनर्जी भी बंगाल के त्योहारों का राजनीतिकरण करती रहती है और वह बंगाली प्राइड कार्ड भी खेलती हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर से सरस्वती पूजा को लेकर चुनाव में भी जाएंगी और यह बताने की कोशिश करेंगी कि टीएमसी ही बंगाली पार्टी है, भारतीय जनता पार्टी नहीं। लेकिन क्या यह असर करेगा यह भी बड़ा सवाल है, क्योंकि भवानीपुर एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां पर हिंदी बोलने वाले लोगों की भी संख्या अधिक है और जो बंगाली हैं वह अगर पहले की तरह ही ममता बनर्जी के साथ रहते हैं फिर तो ठीक है। लेकिन अगर उसमें थोड़ा भी परिवर्तन होता है तो बीजेपी को 3000 की मार्जिन को पार करना मुश्किल नहीं होने वाला है। भवानीपुर एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है साउथ 24 परगना में जहां पर बीजेपी बहुत पहले से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। यहां पर बीजेपी ने बूथ लेवल पर अध्यक्षों की भी नियुक्ति बहुत पहले से की है। लेकिन यह सारी स्थितियां तभी बनेंगी जब भाजपा अच्छा कैंडिडेट उतारेगी, उस समय चुनाव का माहौल क्या होगा? लेकिन अगर वर्तमान परिस्थिति की बात करें तो ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर आसान नहीं रहने वाला है।

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