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बंगाल चुनाव में साउथ 24 परगना की क्या है अहमियत?: चुनावी कसरत विथ प्रदीप भंडारी

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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अभी 2 महीने का वक्त बाकी है लेकिन सभी राजनीतिक पार्टियां पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। इस दौरान जन की बात की पूरी टीम अपने फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी के साथ बंगाल के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में घूम रही है। इसके साथ ही प्रदीप भंडारी ने अपना लोकप्रिय चुनावी डिजिटल शो “चुनावी कसरत” भी शुरू कर दिया है और चुनावी कसरत के इस एपिसोड में प्रदीप भंडारी ने बताया कि बंगाल के चुनाव में परगना की क्या अहमियत है?

प्रदीप भंडारी ने बताया कि ममता बनर्जी इस बार सरस्वती पूजा को लेकर मैदान में उतर रही हैं और बीजेपी पर प्रहार कर रही हैं। वहीं पर भारतीय जनता पार्टी “जय श्री राम” के नारे के सहारे चुनावी मैदान में है और वह कह रही है कि बंगाल में जय श्री राम बोलने की आजादी नहीं है। यानी कि दोनों पार्टियां अपने-अपने हिसाब से नैरेटिव बना रही हैं। एक तरफ ध्रुवीकरण का कार्ड है तो दूसरी तरफ बंगाली प्राईड कार्ड है।

अगर हम 2019 लोकसभा चुनाव को भी देखे तो आखिरी फेस में ममता बनर्जी ने बंगाली कल्चर का कार्ड खेला था। उस समय जब ईश्वर विद्या चंद्र विद्यासागर की मूर्ति को क्षति पहुंचाई गई थी तब ममता बनर्जी ने इसका पूरा दोष बीजेपी पर मढ़ा था। यह सिर्फ कोलकाता की बात नहीं है बल्कि साउथ परगना और नॉर्थ परगना में भी दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर डेंट करने की कोशिश में लगी हुई है। इसके साथ एक बात और देखी गई है कि जिस भी पार्टी ने बंगाल के परगना में जीत हासिल की है उसे ही राज्य की कमान मिली है। तो अगर जय श्री राम का नारा चला तो बीजेपी परगना में आगे हो जाएगी और अगर बंगाली कल्चर का कार्ड चला तो ममता बनर्जी परगना में आगे हो जाएंगी। यानि बंगाल चुनाव जीतने के लिए परगना जितना काफी महत्वपूर्ण होगा।

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