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त्रिपुरा के पहले और सबसे बड़े ओपिनियन पोल को जन की बात के फाउंडर सीईओ प्रदीप भंडारी ने साझा किया न्यूज़ एक्स के साथ

साल 2018 त्रिपुरा के इतिहास के अहम पन्नों मे शामिल होेने की कगार पर है क्योकि पिछले 25 सालों से त्रिपुरा पर अपनी सरकारी गद्दी जमाए बैठे माणिक सरकार को इस साल के चुनावों को जीतने के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, मसला यूं है कि इस साल होने वालेे विधानसभा चुनावों में सीपाआईएम को कड़ी टक्कर देने के लिए भाजपा ने भी ऐड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया है। सत्ता के इस खेल को करीब से देखकर जन की बात टीम ने इस विधानसभी चुनाव से पहले त्रिपुरा राज्य का पहला और सबसे बड़ा ओपिनियन पोल 5 फरवरी को घोषित किया था और ओपिनियन पोल के नतीज़ो ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। त्रिपुरा के पहले और सबसे बड़े ओपिनियन पोल को जन की बात के फाउंडर सीईओ प्रदीप भंडारी ने साझा किया न्यूज़ एक्स और हेडलाइन्स त्रिपुरा के साथ।

न्यूज़ एक्स के साथ अपने ओपिनियन पोल को साझा करते हुए सीईओ प्रदीप भंडारी ने बताया कि जनता से बात करने के बाद उन्हे लगा कि वर्तमान सरकार के लिए लोगो के बीच एक अलग सा रोष है जो इस साल चुनावो मे उनके द्वारा व्यक्त किए जाने कि पूरी संभावना नज़र आ रही है लेकिन जब आप दक्षिणी त्रिपुरा की तरफ जाकर लोगो से बात करेंगें तो पता चलता है कि वहां कि जनता बिना कुछ खास कहे अपनी राय चुनावी नतीजों में दिखाने के लिए बेताब है। इसी बीच उन्होंने बताया कि आने वाला विधानसभा चुनाव सीपीाआईएम के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है क्योकि 2018 से पहले त्रिपुरा में सीपीआईएम को कड़ी टक्कर देने लायक कोई पार्टी मौजूद ही नही थी और ना ही अब तक त्रिपुरा राज्य की जनता के पास सीपीाआईएम के अलावा कोई और विकल्प मौजूद था। जन की बात के सीईओ प्रदीप भंडारी ने इसी के साथ ओपिनियन पोल के नतीजों को घोषित किया जिसमें भारतीय जनता पार्टी को इस साल त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में 31-37 सीट मिलने की संभावनाऐं है जबकि सीपाआईएम को 23-29 सीट मिलेंगी तो वहीं अगर दूसरी ओर गौर किया जाए तो कांग्रेस पार्टी और बाकी पार्टियों के उम्मीदवारों को इस साल एक भी सीट ना मिलने पूरी संभावना है। इस ओपिनियन पोल में त्रिपुरा के सीएम माणिक सरकार को उनकी धानपुर की सीट मिलने की पूरी संभावना है और इसके पीछे की गुत्थी को सुलझाते हुए जन की बात सीईओ प्रदीप भंडारी ने बताया कि धानपुर में माणिक सरकार की साफ सुथरी छवि ही उन्हे इस बार भी धानपुर की सीट जिताएगी क्योकि धानपुर और उसके आसपास रहने वाले लोग सीपीआईएम के वफादार सर्मथकों में गिने जाते हैं। हालांकि उन्होने ये भी कहा कि अगर आप त्रिपुरा के 5 नौजवानों से बात करते हैं तो आपको पता चलता है कि उनके लिए बेरोज़गारी सबसे बड़ी परेशानी है और 25 सालों से त्रिपुरा पर अपनी पकड़ बनाए रखने वाली सीपीआईएम ने उन्हे बाकी के राज्यों के मुकाबले रोज़गार के मौके ही नही दिए है।

तना-तनी की इस चुनावी जंग में सीपीआईएम एक बार जीत अपने नाम दर्ज करेगी या फिर भाजपा 25 सालों से राज कर रही सीपीआईएम को मात देकर विधानसभा चुनावों में खुद को एक बार फिर एक खुद अपराजित साबित करेगी, ये देखना रोमांचक होगा।

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