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प्रदीप भंडारी, सीईओ जन की बात ने हेडलाइंस त्रिपुरा पर पेश किया त्रिपुरा चुनाव का ओपिनियन पोल: बीजेपी की बन सकती है प्रदेश में सरकार

2018 में त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा चुनावों में वर्तमान माणिक सरकार को कड़ी टक्कर देने के लिए मैदान में उतरी भाजपा ने सत्ता के पूरे खेल को उठा-पटक करने की ठान ली है। जहां सीपीआईएम इस साल भी अपने वफादार सर्मथकों के सहारे जीतने की कोशिश करती नज़र आ रही है तो वही भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर राजनाथ सिंह तक सभी को त्रिपुरा की जनता को रिझाने का कार्यभार सौंप दिया है। जन की बात टीम ने सत्ता के इसी खेल करीब से देखने के बाद 5 फरवरी को अपना ओपिनियन पोल त्रिपुरा के चैनल हेडलाइन्स त्रिपुरा के माध्यम से त्रिपुरा की जनता के बीच रखा। इस कार्यक्रम में जन की बात के सीईओ प्रदीप भंडारी मौजूद रहे। बांग्लादेश के बाॅर्डर से जुड़ा हुआ ये छोटा सा राज्य जिसमें करीब 25 लाख वोटर है जोकि इस साल विधानसभा चुनावों में अपने वोट की ताकत का एहसास कराने के लिए बेसब्र है।

हेडलाइन्स त्रिपुरा पर त्रिपुरा के सबसे पहले और सबसे बड़े ओपिनियन पोल को त्रिपुरा की जनता के बीच रखा जन की बात सीईओ प्रदीप भंडारी ने, यह पूछे जाने पर कि उन्होने त्रिपुरा को उसके पहले और सबसे बड़े ओपिनियन पोल को जनता के सामने रखने कि क्यो सोची तो उन्होने बताया कि राष्ट्रीय मीडिया के बीच त्रिपुरा के चुनावों को नज़रअंदाज किया जाता रहा है और इसलिए उन्होने सोचा कि ये उनका दायित्व है कि वो त्रिपुरा जाएं और करीब से त्रिपुरा को जाने, उसकी जनता को समझे, उनकी परेशानियों को समझे और देश के समक्ष रखें। अपने और अपनी टीम के ओपिनियन पोल को त्रिपुरा की जनता के सामने पेश करने से पहले सीईओ प्रदीप भंडारी ने बताया कि उन्होने और उनकी टीम ने त्रिपुरा की 60 विधानसभाओं में जाकर वहां के लोगो से बातचीत करके और बहुत ही गहन अध्यन्न के बाद ओपिनियन पोल के नतीजों को घोषित करने का फैसला किया है। हेडलाइन्स त्रिपुरा पर ओपिनियन पोल को घोषित करते हुए जन की बात सीईओ प्रदीप भंडारी ने बताया कि उनके और उनकी टीम के मुताबिक त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीट्स में से भाजपा और आईपीएफटी के गठबंधन को 31 से 37 सीट्स मिलने की संभावना है जबकि पिछले 25 सालों से त्रिपुरा की राजगद्दी पर शासन कर रही सीपीआईएम को इस साल 23 से 29 सीट मिलने की संभावना जताई है हालांकि विधानसभा सीट की इस दौड़ में कांग्रेस और बाकि पार्टियों को एक भी सीट नही मिलने की आशंका है। अपने ओपिनियन पोल में भाजपा को 31 से 37 सीट देने की वजह के पीछे प्रदीप भंडारी ने बताया कि पिछले तीन सालों से त्रिपुरा में भाजपा पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग विधानसभाओं में काफी काम किया है जिसकी वजह से उनके पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने की उम्मीद है। साथ ही उन्होने ये भी कहा कि पिछले 25 सालों में सीपीआईएम को चुनावों में टक्कर देने के लिए कांग्रेस के अलावा कोई और पार्टी नही थी और 1980 के दंगों के बाद कांग्रेस की कुछ खास पकड़ त्रिपुरा में बची नही थी लेकिन 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चुनावी जंग के मैदान में उतर कर इस चुनावी लड़ाई में सीपीआईएम को कड़ी चुनौती दी है। इस दौरान उन्होने ये भी बताया कि सीपीआईएम को मिलने वाली 23 से 29 का राज़ माणिक सरकार की साफ-सुथरी छवि को बताया है लेकिन इस बार त्रिपुरा के लोग इस बार भाजपा वोट देने के लिए इसलिए भी तैयार है क्योकि उन्हे मनरेगा भत्ता नही मिलता है, सरकारी नौकरी वालों को चैथां वेतन मान दिया जाता है जबकि पूरे देश में सातवें वेतन मान के हिसाब से सरकारी नौकरी करने वालों को वेतन दिया जाता है। त्रिपुरा का नौजवान नौकरी बारे में पूछे जाने पर सोच में पड़ जाता है क्योकि राज्य में नौकरियां ही नही है, नौकरियां तो नौकरियां त्रिपुरा राज्य में अच्छे काॅलिजस के भी लाले पड़े हुए है, राज्य में रहने वाले लोग अपना अच्छा इलाज करवाने के लिए कलकत्ता जाते है और यही सब परेशानियां है जो त्रिपुरा की जनता को पिछले कई सालों से परेशान कर रहीं है।

ओपिनियन पोल में सीईओ प्रदीप भंडारी ने साफ बताया कि ओपिनियन पोल के नतीज़ें असल नतीज़ों से अलग भी हो सकते है लेकिन सीपीआईएम और भाजपा की टक्कर की चुनावी जंग में आखिकार जीत किसके नाम लिखी जाती है ये देखना दिलचस्प होगा।

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