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जन की बात के उत्तराखंड सर्वे पर बोले भाजपा नेता सतीश लेखरा, हरीश रावत कोई फ़ैक्टर नही

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तोषी, जन की बात

साल 2022 के शुरुआत के महीने में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक तैयारियां भी जोरों पर है। उत्तराखंड के मुद्दों, वहां की हवा और उत्तराखंडी लोगों का झुकाव किस पार्टी की तरफ झुकता हुआ नजर आ रहा है इसी को लेकर प्रदीप भंडारी और जन की बात लेकर आए हैं आप सभी के लिए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव सर्वे 2022। प्रदीप भंडारी और उनकी टीम जन की बात ने उत्तराखंड चुनाव के पहले एक बड़ा सर्वे किया। यह सर्वे 20 सितंबर 2021 से लेकर 26 सितंबर 2021 के बीच हुआ। सर्वे के दौरान जन की बात की टीम ने करीब 2000 से ज्यादा लोगों से बात की है। उत्तराखंड की जमीन पर किए गए सर्वे में उत्तराखंड की जनता से पूछा कि आप किसे वोट देंगे और क्यों देंगे?

आपको बता दें कि जन की बात के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदीप भंडारी के द्वारा उत्तराखंड चुनाव को लेकर सबसे सटीक सर्वे पेश किए गए। इस दौरान पैनल पर सतीश लेखरा (भाजपा नेशनल मीडिया इंचार्ज) भी शामिल रहे। डिबेट के दौरान भंडारी ने भाजपा को लेकर सतीश लेखरा से सवाल करते हुए कहा कि उत्तराखंड में बेरोजगारी का मुद्दा जोरों पर है। इसके साथ ही हरीश रावत की लोकप्रियता भी अच्छी खासी है अगर उत्तराखंड में पार्टी विशेष को वोट ना मिलकर इंडिविजुअली वोट दिए जाएं तो क्या इससे भाजपा को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 में नुकसान देखने को मिल सकता है। प्रदीप भंडारी के हरीश रावत फ़ैक्टर को लेकर भाजपा नेता सतीश लेखरा ने कहा कि ‘उत्तराखंड में हरीश रावत का कोई फैक्टर नहीं है। भारतीय जनता पार्टी में कैडर का सिस्टम है। यह कोई मां बेटे की पार्टी नहीं है, ना यह कोई परिवार की पार्टी है और ना कोई इंडिविजुअल की पार्टी है। यहां सब कुछ लोकतांत्रिक तरीके से होगा।

विधायक दल की बैठक के बाद हमारे यहां चेहरे तय किए जाते हैं, नेतृत्व तय किया जाएगा। हमारे यहां ऐसा नहीं है कि दिल्ली से पर्ची भिजवाई जाएगी कि चन्नी साहब को बिठवाना है और अमरिंदर साहब को हटवाना है। हर पार्टी का अपना अलग सिस्टम होता है उनकी पार्टी में है यह चलता है तो ठीक है और दूसरी बात भारतीय जनता पार्टी में कैडर का मतलब है कि हमारी पार्टी और संगठन नीतियों के आधार पर काम करता है। जब हमारी सरकार हमारे आधार पर काम करेगी, हमारे कैडर के आधार पर काम करेगी और जनता के आधार पर काम करेंगी तो हमारा वोट बैंक बना रहेगा। कैडर का मतलब होता है कि जो हमने घोषणा की है, वादे किए हैं वह काम लाइन पर चल रहा है या नहीं। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में पिछले 5 सालों में काम किए हैं तो मैं कह सकता हूं कि हम काम के आधार पर ईमानदारी और पारदर्शिता के आधार पर जरूर उत्तराखंड में वापस आएंगे। इसका भारतीय जनता पार्टी और कार्यकर्ताओं को पूर्ण रूप से विश्वास है।

बता दें कि उत्तराखंड में सर्वे के दौरान ब्राह्मणों के कुल प्रतिशत में से 62% ब्राह्मणों ने कहा कि वह बीजेपी को वोट करेंगे और 34% दलित बीजेपी को पसंद कर रहे हैं। उत्तराखंड में दलित वर्ग भाजपा की नीतियों, काम के आधार से काफी प्रभावित दिखाई दे रहा है। हालांकि 59% दलितों के कांग्रेस के साथ जाने की संभावना है। जबकि 7% दलित आम आदमी पार्टी को वोट कर सकते हैं। वही दूसरी ओर उत्तराखंड में भाजपा को मिल रहे समर्थन के साथ मुस्लिम समुदाय की पहली पसंद कांग्रेस है। 78% मुसलमान मानते हैं कि कांग्रेस उनके लिए सही है और वह कांग्रेस को वोट करेंगे।

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Sombir Sharma
Sombir Sharma - Journalist

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