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सावरकर जी शिवाजी की नीति और चाणक्य नीति को मानते थे।: प्रसिद्ध लेखक उदय माहुरकर ने जनता का मुकदमा पर प्रदीप भंडारी से कहा

उदय माहुरकर देश के प्रसिद्ध लेखक है और हाल ही में उदय माहुरकर ने वीर सावरकर पर एक किताब लिखी है। क़िताब का नाम “Veer Savarkar: The man who could have prevented partition” है। इस किताब का विमोचन मंगलवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।

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मंगलवार को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीर सावरकर पर एक टिप्पणी की और उसके बाद देश में राजनीतिक घमासान मच गया। कांग्रेस पहले की तरह ही एक बार फिर से वीर सावरकर के खिलाफ बयान देने लगी। दरअसल प्रसिद्ध लेखक/ विचारक उदय माहुरकर ने वीर सावरकर पर एक किताब लिखी, जिसका विमोचन संघप्रमुख मोहन भागवत और केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। विमोचन के दौरान ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के कहने पर ही वीर सावरकर ने याचिका डाली थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सावरकर पर और रक्षामंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी चाहती है कि महात्मा गांधी की जगह सावरकर को ‘फादर ऑफ द नेशन’ घोषित कर दिया जाए।

इस पूरे मुद्दे पर जन की बात के संस्थापक और जनता का मुक़दमा के होस्ट प्रदीप भंडारी ने इंडिया न्यूज़ पर सावरकर के बारे में फैलाए जा रहे झूठ पर जनता का मुकदमा शो किया और इस शो में विद्वान लोग उनके साथ जुड़े। प्रदीप भंडारी के साथ इस शो में राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ,बीजेपी के राज्यसभा सांसद और आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा, लेखक अक्षय जोग, वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर और सामाजवादी प्रवक्ता घनश्याम तिवार जुड़े। इस शो में प्रदीप भंडारी के साथ प्रसिद्ध लेखक, विचारक और सावरकर पर किताब (The man who could have prevented partition) के लेखक उदय माहुरकर भी जुड़े। उपरोक्त बताए गए पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सावरकर पर बयान दिया था।

प्रदीप भंडारी के साथ जनता का मुकदमा शो पर प्रसिद्ध लेखक और विचारक उदय माहुरकर ने कहा कि “सावरकर जी क्रांतिकारी थे और गांधीजी के मूल्यों के साथ उनकी तुलना करना सरासर अन्याय है। सावरकर जी शिवाजी की नीति मानते थे और चाणक्य नीति को मानते थे। सावरकर जी की आईडियोलॉजी हिंदुत्व पर आधारित है और उसको आरएसएस भी मानता है। सावरकर समानता को मानते थे।”

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