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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अखिलेश यादव के गढ़ आजमगढ़ में भरी हुंकार, पढ़िए रिपोर्ट

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अनुप्रिया, जन की बात

यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सफल चाणक्य के रूप में साबित हुए अमित शाह को एक बार फिर पार्टी ने वहीं जिम्मेदारी सौंपी है।अमित शाह यूपी में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 300 पार का लगातार नारा दे रहे हैं। इसकी रणनीति को मुकम्मल बनाने के लिए वह पूर्वांचल के दौरे पर थे।

गृहमंत्री अमित शाह आज वाराणसी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ करने के बाद आजमगढ़ और बस्ती पहुंचे थे।आजमगढ़ में अमित शाह ने राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। उनके साथ और भी कई पदाधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा बस्ती में सीएम योगी के साथ सांसद खेल कुंभ का उद्घाटन भी किया।

आजमगढ़ में अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जहां पर कभी महिर्षि वशिष्ठ जी का आश्रम हुआ करता था, उसी भूमि पर आज मां सरस्वती जी का मंदिर बनने जा रहा है। जिस आजमगढ़ को दुनियाभर के अंदर, सपा शासन में कट्टरवादी सोच और आतंकवाद की पनाहगार के रूप में जाना जाता था, उसी भूमि पर हम लोग आज मां सरस्वती जी का धाम बनाने का काम कर रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल को मच्छर और माफिया मुक्त कर दिया। आजगमढ़ भी इसी में शामिल है। जिस आजमगढ़ को आतंवादियों की पनाहगाह के रूप में जाना जाता था आज उसी आजमगढ़ में मां सरस्वती का मंदिर विश्विद्यालय बन रहा है। यह परिवर्तन की शुरुआत है, हमने दस विश्विद्यालय बनाने का वादा किया था, जो आज पूरा हो गया है।वो आगे कहते है कि कांग्रेस, सपा, बसपा वाले हमारे बारे में कहते थे कि मंदिर बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे, लेकिन आपने बहुमत दिया और मंदिर का शिलान्यास हो गया। दुनिया के करोड़ों भारतीयों को मंदिर निर्माण की अपेक्षा थी, जिसे हमने पूरा किया।

आजमगढ़ का दौरा अमित शाह के प्लान में विशेष तौर से है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने यहां से दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में निरहुआ को 3.61 लाख वोट मिला था। हलांकि आजमगढ़ की सीट तब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की झोली में चली गई थी। अखिलेश को कुल 6.21 लाख वोट मिले थे। आजमगढ़ की विधानसभा सीट पर भी 1996 से समाजवादी पार्टी के विधायक दुर्गा प्रसाद यादव का लगातार कब्जा बना हुआ है। दरअसल, यहां करीब 45 प्रतिशत यादव-मुस्लिम मतदाता हैं। अगड़ी जातियां 24 प्रतिशत के करीब हैं। जबकि दलित 30 प्रतिशत के आस-पास हैं। इसलिए भाजपा आजमगढ़ के राजनीतिक समीकरण को बदलने में जी-जान से लगी हुई है।

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