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पीएम मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों के वापस लेने के फैसले के बाद जानिए क्या हो सकता है इसका पंजाब और पश्चिमी यूपी की राजनीति पर असर

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तीन कृषि कानून के विरोध में 1 साल से बैठे किसान संगठन और किसानों के आंदोलन को देखते हुए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सुबह 9:00 बजे अपने प्रसारण के दौरान बड़े ऐलान करते हुए तीनों किसी कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुपर्व और कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया।

इन तीनों कृषि कानूनों के वापस लेने के बाद यूपी और पंजाब की राजनीति को लेकर एक बार फिर से नई बहस का जन्म हो गया है। पंजाब और यूपी के वह क्षेत्र जो किसानों के आंदोलन से प्रभावित होते दिखाई दे रहे थे वहां पर एक बार फिर से बीजेपी की राजनीति गर्म आती दिखाई दे रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया है। यह फैसला आगामी चुनाव को लेकर एक मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी की पकड़ पंजाब में कमजोर होती दिखाई दे रहे थे, तो अब इस फैसले के बाद पंजाब के अंदर बीजेपी ने एक बार फिर से यू टर्न लेते हुए एक मजबूत दावेदारी पेश करने की कवायद शुरू कर दी है।

पश्चिमी यूपी की राजनीति पर कितना होगा इस फैसले का असर

किसान आंदोलन का सबसे बड़ा असर और राजनीतिक नुकसान अगर कहीं बीजेपी को उठाना पड़ सकता था तो वह है बीजेपी का सबसे मजबूत क्षेत्र पश्चिमी यूपी।आपको बता दें कि, यूपी विधानसभा की कुल 404 में से 110 सीटों पर किसान वोटर चुनावों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। 2012 के चुनाव में भाजपा को इनमें से 38 सीटें मिली थीं, जो 2017 में बढ़कर 88 हो गई थीं। साफ है कि भाजपा इन सीटों पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।

कैसा रहेगा फैसले का पंजाब पर असर

चुनाव के दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो भाजपा के लिए किसान आंदोलन से सबसे अधिक प्रभावित हुए राज्य रहा है तो वह है पंजाब…

पंजाब में कृषि कानूनों को लेकर जनता के बीच में खासा नाराजगी साफ तौर पर दिखाई दे रही थी। जिसको लेकर बीजेपी के हाईकमान और बीजेपी संगठन दोनो काफी चिंतित भी दिखाई दे रहे थे। परंतु वापस लेने के फैसले के बाद पंजाब की राजनीतिक हवा में कुछ बदलाव होता नजर आ रहा है।

पंजाब की 117 सीटों पर किसानों की बड़ी भूमिका है। पिछले चुनावों में यहां कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में 77 सीटें जीती थीं, भाजपा को सिर्फ 3 सीटों से संतोष करना पड़ा था। यहां अमरिंदर सिंह साथ आते हैं तो भाजपा का बड़ी सफलता मिल सकती है।

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Sombir Sharma
Sombir Sharma - Journalist

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