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जम्मू-कश्मीर में बाहरी वोटर के वोटिंग के अधिकार से महबूबा को क्यों हुई दिक्कत?

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जम्मू-कश्मीर से बड़ी खबर के साथ ही सियासत पूरी तरह से गरमा गई है । नई मतदाता सूची को लेकर सियासी गलियारों में घमासान मचा है। मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के बाद पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस केंद्र सरकार पर हमलवार है। दोनों दल इसे भाजपा की वोटों की साजिश बता रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में बाहरी वोटर के वोटिंग के अधिकार से महबूबा को क्यों हुई दिक्कत?

बीते बुधवार को मुख्य चुनाव अधिकारी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ने मतदाता सूची को लेकर एक प्रेस वार्ता किया , जहां उन्होंने कहा की जम्मू-कश्मीर में मतदाता बनने के लिए स्थानीय होना जरुरी नहीं है, इस वार्ता के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घमासान मचा दिया। महबूबा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीडीपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भाजपा इस नियम के साथ घाटी में वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है, राज्य में भाजपा के द्वारा 25 लाख मतदाता घुसपैठ करवाने की भी ख़बर आ रही है, भाजपा का ये सपना कभी पुरा नहीं होगा कश्मीर में।

चुनाव आयोग की माने तो जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के तहत मतदाताओं की संख्या में 20 से 25 लाख की बढ़ोतरी संभव है, प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार सिंह के दावे के अनुसार मतदाताओं की संख्या वर्तमान में 76 लाख से बढ़कर एक करोड़ से ज्यादा हो जाएगी। चुनाव विभाग की तरफ से इस सिलसिले में मतदाता सूचियों में विशेष सारांश संशोधन का काम 15 सितंबर से शुरू होगा।

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Sombir Sharma
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Sombir Sharma - Journalist

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