भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। प्रदीप भंडारी के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से लगातार चुनाव आयोग और SIR को लेकर तीन प्रमुख मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इनमें एक प्रमुख दावा यह है कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए और SIR का फैसला भी सर्वसम्मति से नहीं हुआ। इस दावे के जवाब में प्रदीप भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बहु-सदस्यीय आयोग में मतभेद होने की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा विवाद में चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि SIR समेत उसके सभी अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद सामने आया जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा बताते हुए कहा कि अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां अंतिम निर्णय के समान नहीं होतीं और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
प्रदीप भंडारी ने इसी आधार पर राहुल गांधी के चुनाव आयोग में कथित असहमति को लेकर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाया। उनका तर्क है कि यदि दो चुनाव आयुक्त किसी अंतिम फैसले से औपचारिक रूप से असहमत होते, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते थे और बहुमत के नियम के तहत आयोग की निर्णय प्रक्रिया आगे बढ़ती। चुनाव आयोग की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्ट में बताई गई टिप्पणियां अंतिम निर्णयों पर औपचारिक असहमति नहीं थीं।
प्रदीप भंडारी ने अंत में कांग्रेस और राहुल गांधी से यह सवाल किया कि क्या वे चुनाव आयोग और SIR को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद देश से माफी मांगेंगे। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की समानता का हवाला देते हुए कहा कि जिस चुनावी व्यवस्था के तहत केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस सरकार बनाती है, उसी व्यवस्था के तहत रायबरेली समेत देश के अन्य क्षेत्रों में भी चुनाव होते हैं।
