बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का राहुल गांधी पर हमला, बोले- चुनाव आयोग के नोट ने कांग्रेस के दावों को किया एक्सपोज

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सहसंयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने SIR को लेकर कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के आधिकारिक नोट से कांग्रेस द्वारा SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर किए जा रहे दावे गलत साबित हुए हैं। प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार यह दावा कर रहे थे कि SIR की प्रक्रिया को चुनाव आयोग के भीतर सर्वसम्मति से मंजूरी नहीं मिली थी और इसमें असहमति थी। उन्होंने चुनाव आयोग की बैठक के नोट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों के लिए 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था।

प्रदीप भंडारी ने कहा, “कोई डिसेंट नहीं था। SIR का फैसला सर्वसम्मति से हुआ था।” उन्होंने आगे कहा कि अगर दो चुनाव आयुक्तों को इस फैसले पर आपत्ति होती तो वे मुख्य चुनाव आयुक्त के आदेश को रोक सकते थे। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग में फैसले बहुमत की राय के आधार पर लिए जाते हैं और मौजूदा मामले में आयोग के नोट से स्पष्ट है कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद या टकराव की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि SIR से संबंधित बैठक में तीनों चुनाव आयुक्त मौजूद थे।उन्होंने कहा कि बैठक की तस्वीर में भी तीनों चुनाव आयुक्तों की मौजूदगी स्पष्ट दिखाई देती है। प्रदीप भंडारी के मुताबिक, इससे उन मीडिया रिपोर्टों और कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े होते हैं, जिनमें चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की बात कही जा रही थी।

प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के उस आरोप को भी खारिज किया कि चुनाव आयोग को हाईजैक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने अपने नोट में स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दस्तावेज से यह स्पष्ट होता है कि आयोग स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और SIR की प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।

प्रदीप भंडारी ने SIR और गोवा में मतदाता सूची से नाम काटे जाने को लेकर कांग्रेस के दावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा नाम काटे जाने की बात कही जा रही थी, जबकि चुनाव आयोग के नोट में नाम जोड़े जाने की बात दर्ज है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के नोट ने कांग्रेस के दावों को एक-एक करके एक्सपोज कर दिया है। प्रदीप भंडारी ने इसे कांग्रेस की ओर से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश बताया।

प्रदीप भंडारी ने अंत में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र में अपना विश्वास खो चुकी है और जनता के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अविश्वास पैदा करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग का आधिकारिक नोट कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने लाता है। प्रदीप भंडारी ने अपने बयान में कांग्रेस के दावों को चार बिंदुओं में खारिज करते हुए कहा कि SIR को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली, चुनाव आयोग को हाईजैक किए जाने का दावा गलत है, चुनाव आयुक्तों के बीच किसी लड़ाई का प्रमाण नहीं है और गोवा में नाम काटे जाने का दावा भी गलत है।

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