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बंगाल में लोग जंगलों में किए जा रहे क्वॉरेंटाइन,लोग घास पर सोने को मजबूर देखिए प्रदीप भंडारी की रिपोर्ट

 

जन की बात की टीम और उसके फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी लगातार देश के हरेक राज्य से लॉक डाउन के दौरान और कोरोना काल में जमीनी हकीकत आप तक पहुंचा रहे हैं। प्रदीप भंडारी ने अपनी यात्रा के अंतिम दौर में बंगाल राज्य का दौरा कर वहां पर सरकार के इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान प्रदीप भंडारी पहुंचे बंगाल के रतुआ विधानसभा क्षेत्र के क्वॉरेंटाइन सेंटर में जहां पर हमने यह जानने की कोशिश की बंगाल के क्वॉरेंटाइन सेंटर का क्या हाल है? क्या ममता सरकार लोगों को सुविधाएं दे रही है या नहीं दे रही है? केंद्र की योजनाएं गरीब लोगों तक पहुंच रही है या नहीं पहुंच रही है? बंगाल में कोरोना के टेस्ट कराए जा रहे हैं या फिर नहीं?

बंगाल में रतुआ विधानसभा क्षेत्र क्वॉरेंटाइन सेंटर का सच क्या है?

आपको बता दें कि जन की बात की टीम और उसके फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी सिर्फ एक ही विधानसभा क्षेत्र के क्वॉरेंटाइन सेंटर में नहीं गए। बल्कि उन्होंने रतुआ विधानसभा क्षेत्र के क्वॉरेंटाइन सेंटर का भी दौरा किया। यहां पर सबसे दयनीय स्थिति थी की ये क्वॉरेंटाइन सेंटर जंगलों में बनाया गया था। वहां पर रह रहे लोगों के लिए कोई भी सुविधा नहीं दी थी। एक तरीके से यह कहे तो सरकार ने यहां पर छलावा किया था लोगों के साथ। यहां पर सेंटर में ना ही सोने के लिए बेड, न गद्दा ,ना बिजली, न पानी लोग घांस पर सोते है और मच्छर से बचाव के लिए कोई उपाय भी नहीं।

आपको बता दें कि यहां के क्वॉरेंटाइन सेंटर को देखने के बाद प्रदीप भंडारी ने कहा कि बंगाल में गरीब यह सोचता है कि वह एक ऐसे सिस्टम के जाल में फंस चुका है जहां पर गरीब के लिए कोई सुनवाई नहीं है। इससे दयनीय स्थिति अभी तक कहीं नहीं देखी गई।

आपको बता दें कि जांच पड़ताल के दौरान हमने पाया कि जब इन लोगों को यहां पर लाया गया था। तब इन्हें सिर्फ एक सैनिटाइजर दिया गया था जिसके बाद यहां पर किसी डॉक्टर ने भी दौरा नहीं किया।

मोदी सरकार से कुछ मिला?

बंगाल यात्रा के दौरान जन की बात के फाउंडर एंड सीईओ प्रदीप भंडारी ने सिर्फ क्वॉरेंटाइन सेंटर से ही नहीं बल्कि गरीब जनता से भी उनका हालचाल लिया। इस दौरान उन्होंने कई बुजुर्ग लोगों से बात की और उन्होंने बताया कि मोदी सरकार से ₹500 और गैस सिलेंडर फ्री मिला लेकिन ममता सरकार ने लॉक डाउन के दौरान गरीबों को कुछ नहीं दिया। कई बुजुर्गों ने भी कहा कि केंद्र से सहायता मिली है,लेकिन राज्य सरकार ने उनका ख्याल नहीं रखा।

इन सब स्तिथियों पर प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह सिर्फ कोरोना की लड़ाई नहीं है बल्कि ये 2021 में राजनीति में भी चर्चा का विषय बनेगा। लेकिन राजनीति से ऊपर लोगों का भला होता है।

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Sombir Sharma
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Sombir Sharma - Journalist

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