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क्या आप जानते हैं राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन में POK से लाई मिट्टी भी डाली गई है ?

जी हां आप लोगों ने सही सुना, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से POK से लाई मिट्टी भी राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास में डाली गई है ।

मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र और हिंदू नागरिकों के साथ अत्याचार करने के लिए जाने जाने वाला पाकिस्तान और उसके कब्जे वाला POK से मिट्टी लाने की बात कई लोगों को चौकाती है।

POK में किसी भी भारतीय का जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसे देखते हुए पाकिस्तान की सेना और सरकार यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी, किसी तरह POK के सीमा में ना घुस सके।

क्यों और कैसे लाई गई POK से मिट्टी ?

5 अगस्त रामलला मंदिर निर्माण के शिलान्यास और भूमि पूजन के लिए देश के विभिन्न पवित्र तीर्थ स्थलों व नदियों की पवित्र मिट्टी लाई गई थी।

सनातन धर्म में भूमि पूजन और शिलान्यास के वक्त पवित्र स्थलों की मिट्टी और पवित्र नदियों के जल को डालने की मान्यता है। वही अयोध्या में तो करोड़ों लोगों के आराध्य श्री रामचंद्र के जन्म स्थल के निर्माण की बात थी। इसको देखते हुए देश के अलग-अलग प्रांतों के पवित्र 51 नदियों व तीर्थ स्थलों की मिट्टी डाक द्वारा भेजी गई थी।

अब बात करते हैं POK से लाई मिट्टी की, POK और पाकिस्तान तो पिछले दशक में बने है लेकिन हिन्दू संस्कृति और आस्था के प्राचीन धरोहर वहाँ सैकड़ो सालो से मौजूद है। कश्मीरी पंडितों के आस्था के मुख्य प्रतीको में से एक धरोहर-शारदा पीठ, POK क्षेत्र के उरी से करीब 70 किमी दूर मौजूद है। यहीं पर प्रसिद्ध शारदा विश्वविद्यालय भी मौजूद हुआ करता था, जहां कई विद्वान पढ़ा करते थे जिनमें से आदि शंकराचार्य को भी बताया जाता है।

भारतीयों को इस क्षेत्र में घुसने पर प्रतिबंध के कारण भारत से ताल्लुक रखने वाले चीन के निवासी व्यंकटेश रमन और उनकी पत्नी ने चीनी पासपोर्ट के सहारे हांगकांग होते हुए पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद पहुंचे, फिर उन्होंने आगे POK का रास्ता तय किया। वहाँ से प्रसाद और मिट्टी लाने के बाद हांगकांग होते हुए दिल्ली वापस आ गए। आने के बाद उन्होंने शारदा पीठ के सक्रिय सदस्य अंजनी शर्मा को मिट्टी सौंप दी। अंजनी शर्मा मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचे, जहां उनका खूब स्वागत किया गया।

शारदा पीठ क्यों इतना महत्वपूर्ण है ?

POK से लाई मिट्टी
POK and Sharda Peeth

अगर शारदा पीठ की बात करें तो पाकिस्तान में मौजूद पीठो में से सबसे महत्वपूर्ण पीठ माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार नीलम नदी के किनारे पर मौजूद इस मंदिर का महत्व सोमनाथ के शिवलिंगम मंदिर जितना ही माना जाता है।

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इसे देवी शक्ति के 18 महा‍शक्तिपीठों में से एक माना गया है। यह मंदिर 5000 साल पहले सम्राट अशोक के काल में बनाया गया था।

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