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नशे के कारोबार से आने वाले पैसे का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया जाता है: संघ प्रमुख मोहन भागवत

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आज विजयदशमी है और आज आरएसएस का 96वा स्थापना दिवस भी है। आपको बता दें कि आरएसएस की स्थापना 1925 में विजय दशमी के दिन ही नागपुर में हुई थी। हर विजयदशमी के दिन आरएसएस प्रमुख संबोधन भी करते हैं। आज के दिन आरएसएस प्रमुख जो बात कहते हैं उसी पर अगले 1 साल तक काम किया जाता है। इसलिए भी आरएसएस प्रमुख का विजयदशमी के दिन का संबोधन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन ही आरएसएस प्रमुख हेड क्वार्टर पर शस्त्र पूजन भी करते हैं और आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस मुख्यालय पर शस्त्र पूजन किया भी। इस दौरान उन्होंने संबोधन भी किया और उसमें उन्होंने नशे पर एक महत्वपूर्ण बात कही।

विजयदशमी के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निशाना साधा और उन्होंने कहा कि , “ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्या दिखाया जाता है, कोई नियंत्रण नहीं है। आज बच्चे बच्चे के पास फोन हो चुका हैं और देश में इस तरह के नशीले पदार्थों का प्रयोग बढ़ रहा है। इसे कैसे रोका जाए ,पता नहीं? साथ ही साथ मोहन भागवत ने कहा कि, “आज बड़े से लेकर समाज के आखिरी आदमी तक भयंकर नशे की लत में है। नशे के कारोबार से आने वाले पैसे का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया जाता है और सीमा पार के देश उसे प्रोत्साहन देते हैं।”

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि खोई हुई हमारी अखंडता को वापस लाने के लिए उसके इतिहास को जानना सबसे अधिक जरूरी है। नई पीढ़ी को इस पर काम करना चाहिए और इसे जानना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि, “हमारी संस्कृति किसी को पराया नहीं मानती और उसके उदय से ही दुनिया में समानता आएगी। अगर हिंदुत्व का उदय होगा तो जो लोग कलह का कारोबार करते हैं उनकी दुकान बंद हो जाएगी। हिंदुओं को बांटने का काम चल रहा है। लोगों को फेडरल रहना होगा। देश के लोग एक हैं और जरूरत है कि मतभेदों को समाप्त किया जाए।”

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