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उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में अफस्पा (AFSPA ) कम करने के ऐलान पर प्रदीप भंडारी का मुकदमा, पढ़िए उनकी दलील

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हिमानी जोशी, जन की बात

आज केंद्र सरकार ने नगालैंड, असम और मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत शांत क्षेत्रों को कम करने का फैसला किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर ये जानकारी दी है. ये फैसला कल यानी 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा. बृहस्पतिवार को जनता का मुकदमा के प्राइम टाइम शो में प्रदीप भण्डारी ने मुकदमे का मुख्य मुद्दा यही बनाया.

जनता का मुकदमा पर प्रदीप भंडारी ने अपनी दलील में कहा: दोस्तों भारत बदल रहा है आज यह कहने में कोई गलत नहीं होगा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी में देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत हुई है. आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है इस निर्णय को लेते वक्त अफस्पा के तहत अशांत क्षेत्रों को कम करने का निर्णय लिया गया.

प्रदीप भंडारी ने शो के दौरान दिया फैक्ट चेक

प्रदीप भंडारी ने कहा, पिछले 7 सालों के अंदर उत्तर पूर्व के अंदर उग्रवादी शक्तियां हार रही है, अधिकांश उग्रवादी समूह ने हथियार डाल दिए हैं. 7000 उग्रवादियों ने सरेंडर किया है. जनवरी 2020 को असम की पांच दशक पुरानी बोडो समस्या का समाधान निकाल दिया गया है. 4 सितंबर 2021 को कार्बी आंगलोंग समझौता से करीबी क्षेत्रों के विवाद को खत्म किया गया है. त्रिपुरा में उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एनएलएफटी-एसडी समझौता किया. 16 जनवरी 2022 को 37,000 आंतरिक विस्थापित लोगों को त्रिपुरा मैं बसाया गया.

29 मार्च को असम और मेघालय राज्य की सीमा के संबंध में एक महत्वपूर्ण समझौता दो दिन पहले ही हुआ. 1990 से आसाम में अफस्पा लागू था, 1 अप्रैल से 23 जिलों को पूर्ण रूप से और 1 जिले को आंशिक रूप से अफस्पा से हटाया गया. मतलब 60% आसाम में अफस्पा नहीं रहेगा, यह दिखाता है कि राष्ट्र सुरक्षा किस तरह से आगे बढ़ रही है. संपूर्ण मणिपुर में अफस्पा 2004 से लागू है और अब 6 जिलों के 15 पुलिस स्टेशन अफस्पा हटा दिया गया है. संपूर्ण नागालैंड में अफस्पा 1995 से लागू है अब 7 जिले और 15 पुलिस स्टेशन से अफस्पा हटा दिया गया है.

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