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अग्निवीर भर्ती पर उठे सवालों पर सेना की सफाई, कहा- जाति प्रमाण पत्र पहले भी मांगा जाता था

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अग्निवीर योजना के तहत होने वाली भर्ती योजना में जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगने को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस योजना के तहत भर्ती में जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। इसी बीच सेना ने आरोपों का खंडन कर साफ कर दिया है कि सेना में किसी भी भर्ती में पहले भी उम्मीदवारों से जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगा जाता था। इसे लेकर अग्निपथ योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दरसल, सांसद संजय सिंह ने अग्निपथ योजना पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है। क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के क़ाबिल नही मानते?भारत के इतिहास में पहली बार “सेना भर्ती “ में जाति पूछी जा रही है। मोदी जी आपको “अग्निवीर” बनाना है या “जातिवीर”।

बीजेपी ने किया पलटवार

बीजेपी सोशल मीडिया हेड अमित मालवीय ने संजय सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, सेना ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में स्पष्ट किया था कि वह जाति, क्षेत्र और धर्म के आधार पर भर्ती नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सेना ने यह भी जानकारी दी थी कि किसी भी रेजीमेंट में किसी एक क्षेत्र के अधिक लोगों को रखना प्रशासनिक सहूलियत और काम की जरूरत की वजह से किया जाता है।

क्यों मांगा जाता है धर्म प्रमाण पत्र

सैन्य भर्ती में धर्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर सेना के एक अधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण व तैनाती के दौरान शहीद होने वाले सैनिकों का अंतिम संस्कार करने के लिए धर्म का पता होना आवश्यक होता है। इससे उनका अंतिम संस्कार उसी धर्म के मुताबिक किया जाता है।

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