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अगर जरूरत पड़े तो शहीद दिवस कार्यक्रम में लोगों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को बुलाएं: कोलकाता उच्च न्यायालय ने ममता सरकार से कहा

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कोलकाता उच्च न्यायालय ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को निर्देश दिए है कि शहीद दिवस रैली के दौरान शांति बनाए रखें और जरूरत पड़े तो लोगो की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को बुलाए।

पश्चिम बंगाल  की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज कोलकाता में शहीद दिवस मनाने जा रही हैं. हर साल टीएमसी 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती है. इस मौके पर लाखों कार्यकर्ता इकट्ठा होते हैं, ममता के भाषण को सुनते हैं और आगे की रणनीति पर मंथन किया जाता है.

जानकारी के लिए बता दें कि 21 जुलाई 1993 में सचित्र वोटर पहचान पत्र की मांग पर ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में पुलिस फायरिंग में 13 कांग्रेस कार्यकर्ता मारे गए थे. उन्हीं की याद में हर साल शहीद दिवस का पालन किया जाता है. ममता उस दौरान युवा कांग्रेस की नेता थी.

केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सदस्य नबेंदु कुमार बंद्योपाध्याय बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य (WPA(P) 326 of 2022) द्वारा दायर जनहित याचिका में, ममता बनर्जी के बयान के बारे में मुद्दा उठाया गया है।

आरोप है की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 28 जून, 2022 को आसनसोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए 21 जुलाई, 2022 को भाजपा के खिलाफ जिहाद के दिन के रूप में घोषित करते हुए बयान दिया गया है और टीएमसी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भाजपा के सदस्यों के खिलाफ हिंसा प्रदर्शित करने के लिए उकसाया गया है। खबर है की ,एक विशेष समुदाय को भाजपा के समर्थकों के खिलाफ हिंसा करने के लिए उकसाने के प्रयास किया गया है और  हिंसा की बड़ी आशंका जताई है ।

सुनिश्चित करें कि कोई अप्रिय घटना न हो”:कोलकाता उच्च न्यायालय 

दोनो पक्षों को सुनने के बाद, कलकत्ता में माननीय उच्च न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के संदर्भ में निर्देश दिया कि राज्य के अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे कि कोई अप्रिय घटना न हो और शांति बनी रहे। यदि राज्य पुलिस किसी भी स्थान पर स्थिति को नियंत्रित करने में असमर्थ है तो राज्य के अधिकारी केंद्रीय बलों को बुलाने के लिए तत्काल कदम उठाएंगे।

संबंधित राज्य के अधिकारी घटना के वीडियो फुटेज भी एकत्र करेंगे ताकि उपद्रवियों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। विद्वान महाधिवक्ता को भी निर्देशित किया गया है कि वे अप्रिय घटनाओं में संपत्ति के नुकसान का सामना करने वालों को मुआवजा देने के मुद्दे पर राज्य का रुख स्पष्ट करें।

माननीय न्यायालय ने व्यक्त की गई आशंका को ध्यान में रखते हुए, राज्य के अधिकारियों को अग्रिम रूप से जमीनी स्थिति का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर पहले के निर्देशों के अनुसार केंद्रीय बलों को बुलाने के लिए कदम उठाने का निर्देश देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की, इससे पहले कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए या इससे पहले कि कोई जान-माल का नुकसान हो। राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव निवारक कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया है कि ऐसी कोई घटना न हो। राज्य के अधिकारियों को वीडियो फुटेज एकत्र करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए त्वरित कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया है।

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