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ऋषि सुनक तो बहाना हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असली  निशाना हैं- प्रदीप भंडारी की दलील

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भारतीय मूल के पहले शख्स हैं ऋषि सुनक जो ब्रिटेन के पीएम बने हैं. ऋषि सुनक हिन्दू धर्म को मानते हैं और अपने धार्मिक विश्वास को बिना संकोच जाहिर करते हैं.  ऋषि सुनक की पीएम पद पर ताजपोशी की पुष्टि होने के साथ ही भारत में भी कुछ नेताओं ने अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाया है.

मंगलवार को अपने शो जनता का मुकदमा पर शो के होस्ट प्रदीप भंडारी ने विपक्ष की इसी तुष्टीकरण वाली राजनीति पर आज का मुकदमा किया।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि, शशि थरूर जी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से बात करिए और एक मुस्लिम प्रत्याशी को कर्नाटक का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषीत करदो 2024 /2029 मैं कांग्रेस से गांधी परिवार की बजाय सोनिया गांधी से कहे कि कोई मुस्लिम प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करें , इसके लिए आप को रोक कौन रहा है? या पी चिदंबरम जी एक काम करिए आप सब लोग जो तुष्टीकरण में इतने ग्रस्त हैं एक काम करिए सुधीन ओवैसी को अपना पीएम उम्मीदवार घोषित कर लीजिए, किसने रोका है? या अपने पुत्र कार्ति चिदंबरम की सीट किसी मुस्लिम कांग्रेस एमपी को दे दीजिए।

यह सब दोस्तों ऋषि सुनक के ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रदीप भंडारी ने आगे कहा कि, हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री लाना चाहते हैं अल्पसंख्यक यानी इनको चाहिए मुस्लिम प्रधानमंत्री। क्योंकि अल्पसंख्यक तो डॉ मनमोहन सिंह भी थे 1.7% सिख पापुलेशन से आए दो बार प्रधानमंत्री रहे। आखिर अगर असली अल्पसंख्यक की बात करें तो सिख समुदाय की पापुलेशन 1.76% मुस्लिम समुदाय की 10% से ज्यादा से काफी कम है। पर यह नेता मुसलमानों के अलावा किसी और को अल्पसंख्यक मानते ही नहीं। भले ही इस देश ने मुस्लिम राष्ट्रपति दिए हो, सीजीआई मुस्लिम सीजीआई मिनिस्टर्स, गवर्नर्स दिए हो। लेकिन इनको यह नहीं दिखता और हां यह सब जो बने वह मेरिट पर बने ना कि सिर्फ मुसलमान होने पर। ऋषि सुनक को भी अपने विधायकों का समर्थन मिला इसीलिए वह प्रधानमंत्री बने नाक की भारतीय मूल हिंदू होने पर।

यह सब तुष्टीकरण वाले नेताओं की दिक्कत है, मोदी कैसे तुष्टिकरण नहीं कर रहा तो ऋषि के बहाने यह मोदी पर निशाना साधना चाहते हैं, और हां महबूबा मुफ्ती आप जम्मू कश्मीर में अपनी पार्टी का अध्यक्ष हिंदू  समुदाय से कब बना रही हो?

दोस्तों यह तुष्टीकरण वाले नेताओं को दिक्कत है मेरिट से, सनातन से, बराबरी से इसीलिए यह सब ‘संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार’ वाली राजनीति, जिसको देश नकार चुका है वापस लाना चाहते हैं।

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