भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। स्वाभाविक है इससे विपक्ष को दिक्कत होगी। खासकर कांग्रेस पार्टी ने जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने कहा कि असल में जीडीपी 2.6 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस मुद्दे पर आज तक समाचार चैनल पर बहस चल रही थी जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सहसंयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी मौजूद थे। प्रदीप भंडारी ने आंकड़ों के साथ पूरी सच्चाई बताई।
प्रदीप भंडारी ने कहा, “ऐसा कंक्लूजन या तो कोई राजनीतिक व्यक्ति ले सकता है या दूसरा व्यक्ति ले सकता है जो अर्थशास्त्र राजनीतिक विवशताओं के कारण कर रहा है। United Nations System of National Accounts 1993 यह कहता है कि हर देश को प्रत्येक 5 वर्ष में अपना बेस ईयर को रिवाइज करना चाहिए। भारत 1960-61, 1970-71, 80-81, 93-94 और फिर 1999-2000, 2004-2005, 11-12 और अब 22-23 का बेस ईयर रिवाइज किया है। तो यह बेस ईयर को रिवाइज करना इकोनॉमी की वास्तविकता को दिखाना होता है और हर दुनिया का हर देश करता है। अब बात करते हैं जो बात की गई 2.6% की, यह सरेआम झूठ है। क्योंकि 86 लाख करोड़ की जो जो जीडीपी का कैलकुलेशन था वह 11-12 के बेस ईयर के हिसाब से था। जब बेस ईयर रिवाइज हुआ, यह नेचुरल है कि गूगल मैप 2026 में वह नहीं हो सकता जो गूगल मैप 2011 का है। इकोनॉमी में चीजें जुड़ती हैं, way of collection जुड़ता है, ज्यादा चीजें जुड़ती हैं।”
प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, “तो 86 लाख करोड़ जो था वह 2011-12 के बेस से था। अब अगर आप मुझे बताइए कि इसमें जुगलबंदी आंकड़ों की होती तो भाई 86 लाख करोड़ के बेस को 80 लाख करोड़ का बेस सरकार क्यों करती कि टोटल जीडीपी जो है वह कम है? 80 लाख करोड़ का जो बेस पिछले साल का है वह 25-26 के हिसाब से किया गया है और उसी हिसाब से आज आपका 89 लाख करोड़ का जीडीपी है।तो जीडीपी का बेस ईयर जो है, सेम बेस ईयर पर ही जीडीपी का ग्रोथ कैलकुलेट करेंगे। आप ऐसा नहीं हो सकता कि तरबूज और आम को कैलकुलेट करें, यह बिल्कुल बचकानी हरकत है और सरेआम झूठ है। अब मेरी बात नहीं विश्वास रखते, तो दो-तीन मैं आपको अंतरराष्ट्रीय आंकड़े दिखाता हूँ। आज ही जापान के JSRA ने इंडिया के sovereign rating को अपग्रेड किया है। IMF जिसको यह कोट करते थे कि C grade इंडिया के डाटा को किया, वह भी मैं लेकर आया हूँ। उसमें यह था कि भाई हिंदुस्तान ने अपने बेस ईयर को रिवाइज नहीं किया, सिर्फ उसी क्वांटिटी को सी किया था। तो अब जब इंडिया अपने बेस ईयर को रिवाइज कर रहा है, तो अब जाकर इसको तो इनको स्वागत करना चाहिए।”
प्रदीप भंडारी ने कहा कि अब अगर यह नहीं विश्वास रखते, तो सुनिए। उन्होंने कहा, “IMF, वर्ल्ड बैंक, OECD, कौन सा ऐसा दुनिया का देश, मापदंड क्राइटेरिया है जो कह रहा है कि भारत fastest growing economy नहीं, सब कह रहे हैं।टू-व्हीलर का जो सेल है भारत के इकोनॉमी के अंदर अगर डिमांड नहीं हो रही होती, तो 28 फीसदी से नहीं बढ़ता। थ्री-व्हीलर की सेल 16 फीसदी से नहीं बढ़ती। कमर्शियल व्हीकल की सेल्स 24 फीसदी से नहीं बढ़ती। अब लोगों के पास अगर पैसा नहीं है, तो एवरेज टैक्स कलेक्शन 20% से डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नहीं बढ़ सकता और ओवरऑल जीएसटी जो है वह डबल डिजिट में नहीं बढ़ सकता। प्राइवेट कंजम्पशन 15 से 18% से बढ़ा है।”
प्रदीप भंडारी ने कहा, “तो मुझे लगता है कि जो भी यह आंकड़ा को कंक्लूड कर रहा है, वह सिर्फ और सिर्फ झूठ बोल रहा है और राजनीतिक विवशताओं के कारण अपना इकोनॉमिक एनालिसिस कर रहा है। Fastest growing economy तो है ही, पर बेस भी इम्प्रूव हुआ है, जॉब्स भी क्रिएट हुए हैं और साथ में मैन्युफैक्चरिंग PMI है, जो 54.3 के ऊपर है। मैं डेटा से बात हमेशा करता हूँ, आप काउंटर कर सकते हैं। हिंदुस्तान के अंदर कैसे बैंक्स का NPA कम होते गया है, दोनों नेट और ग्रॉस। जिसके कारण जो बैंक्स की लैंडिंग है, वह ओवरऑल क्रेडिट की ग्रोथ जो है, पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा तेजी से हुई है।”
