भारत चीन से भी बात कर रहा, अमेरिका से भी टेक पार्टनरशिप कर रहा… चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्रों से बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने की बात

भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया और दुनिया में अपनी धमक दिखाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सफल आयोजन किया गया, जिसमें दुनिया के बड़े देश शामिल हुए और एक मंच पर एक राय पर सहमत हुए। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सहसंयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी चंडीगढ़ में छात्रों से बातचीत करने के लिए पहुंचे थे।

छात्रों को संबोधित करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा, “ब्रिक्स में आखिर हुआ क्या है? भारत ने दो विरोधी धड़े एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ यूएई व सऊदी अरब—को एक ही मंच पर साथ लाकर खड़ा कर दिया। ये सभी देश वैश्विक और मध्य पूर्व के संकटों के बीच एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं, लेकिन जब वार्ता की मेज पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने की बात आई, तो सभी ने बिना किसी मतभेद के उस पर हस्ताक्षर कर दिए।”

प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, “आज भारत लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। जब भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को पार करेगा, तब वह एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित होगा। भारत दुनिया का ऐसा अनूठा देश होगा, जो लोकतंत्र, सभ्यता और आर्थिक महाशक्ति—इन तीनों विशेषताओं का एक साथ प्रतिनिधित्व करेगा। दुनिया में शायद ही कोई दूसरा देश इस तरह की उपलब्धि हासिल कर पाया हो या कर पाएगा।भारत अपने आर्थिक हितों के लिए बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल करेगा। वह रूस और ईरान के साथ अपने हितों के अनुरूप समझौते करना चाहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह चीन पर पूरी तरह निर्भर है। भारत चीन के साथ भी बातचीत कर रहा है, क्योंकि वह अपनी सीमाओं पर स्थिरता चाहता है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि भारत अमेरिका के साथ उच्च तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी नहीं कर सकता।”

प्रदीप भंडारी ने बताया कि लोग कह रहे हैं कि भारत ने असंभव को संभव कर दिखाया है। ब्लूमबर्ग को देखिए, वह भी कह रहा है कि भारत ने असंभव को संभव कर दिखाया है। वैश्विक मामलों पर टिप्पणी करने वाले लोग भी इस तथ्य को स्वीकार कर रहे हैं कि भारत अब केवल एक ‘स्विंग नेशन’ नहीं रह गया है, बल्कि आज वह एक अग्रणी वैश्विक शक्ति है। प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह सब लंबे और कठिन कूटनीतिक प्रयासों तथा व्यापक बातचीत का परिणाम है। हमारे देश में समस्याएं हैं, बिल्कुल हैं। लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हम एक राष्ट्र के रूप में मिलकर उन समस्याओं का समाधान करने के लिए काम कर रहे हैं।

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