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खाद्य मुद्रास्फीति प्रबंधन: अमेरिका और जापान से कहीं बेहतर स्थिति में भारत

इस वक़्त जब पूरी दुनिया महंगाई से जूझ रही है ऐसे में खाद्य मुद्रास्फीति प्रबंधन के मामले में भारत की स्थिति दुनिया के बाकी ताकतवर देशों से कहीं बेहतर है। ‘वर्ड ऑफ़ स्टैटिक्स’ के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में खाद्य मुद्रास्फीति अब घटकर 4.79% हो गयी है, और इसे कई लोगों द्वारा राहत का संकेत माना गया।

केंद्र सरकार हर महीने उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) के आंकड़े जारी करती है। यदि मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत से नीचे है, तो इसे बेहतर माना जाता है।

सीपीआई की व्याख्या की तुलना में इस डिस्कनेक्ट का एक कारण यह है कि जनता द्वारा व्यापक रूप से चर्चा की जाने वाली मुद्रास्फीति के आंकड़े वार्षिक संदर्भ में हैं, जहां मूल्य प्रवृत्ति की तुलना पिछले वर्ष के उसी महीने से की जाती है। अब हम मार्च 2023 के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर डालते हैं । खाद्य मुद्रास्फीति का वार्षिक सीपीआई 4.8 प्रतिशत था, जो पिछले वर्ष यानी मार्च 2022 में 7.7 प्रतिशत की मुद्रास्फीति से अधिक था। यह भी लगभग 4.9 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर पर बना था। मार्च 2021 में। यदि आप अधिक ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें, तो देश का खाद्य मूल्य सूचकांक मार्च 2020 से कोविड-19 की शुरुआत के साथ एकतरफा रूप से बढ़ रहा है।

जापान और अमेरिका से बेहतर स्थिति में भारत

वर्ड ऑफ़ स्टैटिक्स के आंकड़ों के मुताबिक़ खाद्य मुद्रास्फीति दर के मामले में भारत की स्थिति अमेरिका, जापान और यूके जैसे देशों से काफी बेहतर है, यूके में खाद्य मुद्रास्फीति 19.7% है जबकि अमेरिका में ये 8.5% और जापान में 7.8% है.

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Vipin Srivastava
Vipin Srivastava
journalist, writer @jankibaat1

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