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हम परिवारवाद का समर्थन नहीं करते इसलिए हो रही है हमारी उन्नति:- अमित शाह

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अनुप्रिया, जन की बात

प्रधानमंत्री मोदी के शासन के 20 साल पूरे होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सरकारी न्यूज चैनल संसद टीवी को एक खास साक्षात्कार दिया। इस दौरान अमित शाह ने पीएम मोदी की लीडरशिप क्वालिटी से लेकर उनकी आलोचनाओं से जुड़े सवालों पर भी जवाब दिए. उनका मानना है आजादी के बाद भारत के लोकतंत्र में पीएम मोदी एक ही राजनीतिक शख्शियत हैं, जिन पर हर प्रकार के आरोप लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन एक भी सिद्ध नहीं हो पाया। इसका एक ही कारण है कि पीएम मोदी का जीवन पारदर्शी है, निजी कुछ भी नहीं है। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हर विरोध के साथ पीएम मोदी और मजबूत होते हैं। लोकतंत्र में इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है कि एक व्यक्ति कड़े फैसले लेता है और देश की जनता चट्टान की तरह उसके साथ खड़ी रहती है।

उनसे पूछे जाने पर कि आखिर क्या वजह है कि विपक्ष मोदी जी की इतनी आलोचना करता है। इस पर वह जवाब देते हैं की हमारे देश में आजादी के बाद तीन से चार बड़ी-बड़ी विचारधारा चली। जिसमें से एक समाजवादी पार्टी थी वह आंदोलन पहले सिमटकर जातिवाद में परिवर्तित हुआ और अब परिवारवाद मैं परिवर्तित हो गया है। कांग्रेस पार्टी भी परिवारवाद में सिमट कर रह चुकी है। तो यह दोनों पार्टी की विचारधारा सिर्फ परिवारवाद में सीमित रह गई कि जो मेरा है वही श्रेष्ठ है।उन्होंने कहा, ‘वामपंथी रास्ता गरीब का उत्थान करना है ही नहीं, बल्कि उसके अंदर के असंतोष को राजनीतिक पूंजी बनाकर सत्ता पर बैठना है. करीब 27 साल बंगाल में वामपंथी शासन के बाद बंगाल की स्थिति देखिए, त्रिपुरा की स्थिति देखिए, और इनकी गुजरात से तुलना कीजिए.’ उन्होंने कहा कि हम दक्षिणपंथी माने जाते हैं लेकिन हम एकात्म मानववाद को मानते हैं और अंत्योदय हमारा मूल है।

गांधी परिवार पर तंज कसते हुए शाह ने कहा, ‘कुछ परिवार तो आज भी मानते हैं कि हमारे परिवार के अलावा कोई और कैसे देश का प्रधानमंत्री बन सकता है. वो परिवारवादी विचारधारा है.’ उन्होंने कहा, ‘चाणक्य ने एक सूत्र दिया था कि जो ज्येष्ठ होता है वो श्रेष्ठ नहीं होता, जो श्रेष्ठ होता है वो ज्येष्ठ होता है. इन्होंने कहा कि मैं ही श्रेष्ठ हूं. हमारे अलावा किसी को शासन करने का अधिकार नहीं है. मैं जब एसपीजी का कानून लेकर आया तो भी गांधी परिवार को क्यों हटा रहे हैं. मेरा सवाल अलग है कि क्यों रखें. कानून देश के लिए है, गांधी परिवार के लिए नहीं है. आप प्रधानमंत्री बनकर आओ, आपको अपने आप सुविधा मिलेगी. नहीं बनोगे तो छोड़ दोगे. कल को मेरी सरकार नहीं होगी तो मुझे भी आम आदमी के जैसे जीना चाहिए. इसी प्रकार से वामपंथी मित्रों की भी मानसिकता है.’

बाद में गृह मंत्री इसी बात पर ट्वीट के जरिये अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहते है कि, किसी दूसरी विचारधारा का नेता अगर सफल हो जाए वो सहन ना कर पाना राजनीति के लिए ठीक नहीं है।

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Sombir Sharma
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Sombir Sharma - Journalist

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