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कॉमेडियन वीर दास ने अमेरिका में दिया भारत विरोधी बयान,FIR दर्ज

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ऋषभ सिंह, जन की बात

कॉमेडियन वीर दास को देश को अपमानित करने वाली कविता के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उनके वीडियो की सोशल मीडिया पर ख़ूब चर्चा हो रही है। कई लोग ये कविता सुनने के बाद वीर दास की तारीफ कर रहे हैं तो कई लोग उन पर भारत की छवि वैश्विक स्तर पर खराब करने का आरोप लगाते हुए उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अब दिल्ली और मुंबई के थानों में शिकायत दी गई है।

वीर दास के खिलाफ दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में आदित्य झा नाम के शख्स ने शिकायत दी है. शिकायत में लिखा है कि कॉमेडियन वीर दास द्वारा अमेरिका में आयोजित कार्यक्रम में देश के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करते हुए वीडियो बनाया गया है. इसी तरह मुंबई में एडवोकेट आशुतोष दुबे ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. वीर दास के मुद्दे पर कांग्रेस भी बंटी हुई नजर आ रही है. एक तरफ शशि थरूर, कपिल सिब्बल वीर दास के समर्थन में हैं, वहीं अभिषेक मनु सिंघवी वीर दास के खिलाफ हैं.

बता दें कि वीर दास इन दिनों अमेरिका में हैं। बीते दिनों उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर ‘आई कम फ्रॉम टू इंडियाज’ टाइटल वाला एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में वीर दास भारत पर एक कविता कहते सुनाई दे रहे हैं।

वीर दास की कविता ‘टू इंडियाज’

मैं उस भारत से आता हूं, जहां AQI 9000 है लेकिन हम फिर भी अपनी छतों पर लेटकर रात में तारे देखते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां आप हमारी हंसी की खिलखिलाहट हमारे घर की दीवारों के पार से भी सुन सकते हैं। मैं उस भारत से भी आता हूं, जो कॉमेडी क्लब की दीवारें तोड़ देता है, जब उसके अंदर से हंसी की आवाज आती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां ओल्ड लीडर्स अपने मरे पिता के बारे में बात करना बंद नहीं करते और न्यू लीडर्स अपनी जीवित मां के रास्तों पर चलना शुरू नहीं करते।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां की एक बड़ी आबादी 30 साल से छोटी है, लेकिन फिर भी 75 साल के लीडर्स के 150 साल पुराने आइडियाज को सुनना बंद नहीं करते।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां लोग क्लब के बाहर सड़कों पर सोते हैं, लेकिन साल में 20 बार तो सड़क ही क्लब होती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम वैजिटेरियन होने में गर्व महसूस करते हैं, लेकिन उन्हीं किसानों को कुचल देते हैं, जो ये सब्जियां उगाते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जो कभी चुप नहीं होता और मैं उस भारत से आता हूं जो कभी नहीं बोलता।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां बच्चे मास्क लगा कर एक दूसरे का हाथ थामते हैं और मैं उस भारत से भी आता हूं, जहां के लीडर्स बिना मास्क लगाए गले मिलते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम बॉलीवुड की वजह से ट्विटर पर बंटे होते हैं, लेकिन थिएटर के अंधेरे में उसी बॉलीवुड की वजह से एक साथ होते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम जब भी ‘ग्रीन’ के साथ खेलते हैं, ब्लीड ब्लू का नारा देते हैं, लेकिन ग्रीन से हारने पर हम अचानक से ऑरेंज हो जाते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां म्यूजिक हमारा ‘बहुत हार्ड’ है, लेकिन जज्बात ‘बहुत सॉफ्ट’ हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जो ये देखेगा और कहेगा ‘ये कॉमेडी नहीं है.. जोक कहां है ?’ और मैं उस भारत से भी आता हूं, जो ये देखेगा और जानेगा कि ये बहुत बड़ा जोक ही है, बस फनी नहीं है।

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