बीते गुरुवार को ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी ने एशियानेट सुवर्णा न्यूज़ चैनल पर कन्नड़ भाषा में अपना दुसरा ओपीनियन पोल जारी किया। प्रदीप भंडारी ने जैसे ही कन्नड़ भाषा में बोलना शुरु किया मानों सोशल मीडिया पर उनकी वाहवाही की कतार लग गई। टीवी पर देख रहे दर्शक ने बहुत ही सराहना व्यक्त की।
वैसे प्रदीप भंडारी जिस राज्य में भी जाते है चुनाव विष्लेषण में वो वहां की भाषा में माहिर हो जाते हैं। प्रदीप भंडारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि कन्नड़ भाषा बहुत ही सरल और प्यारी भाषा है। मैंने बहुत कम वक्त में ही कन्नड़ बोलना शुरु कर दिया था।
प्रदीप भंडारी ने कहा कि कन्नड़ भारत की सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली भाषाओं में से एक है। कन्नड अन्य द्रविड़ भाषाओं की तरह है और तेलुगु, तमिल और मलयालम इस भाषा से मिलली-जुलती हैं। प्रदीप भंडारी ने कहा मुझे कन्नड़ भाषा ने बहुत ही प्रभावित किया है।
कन्नड द्रविड़ भाषा परिवार की प्रमुख भाषाओं में एक है। शिलालेखन के इतिहास के अनुसार कन्नड तमिल से भी पुरानी मानी जाती हैं उसका प्राचीन साहित्य महान भक्त कवियों के अमृत वाणी से सिचित हो सरस उठा है, जिस का रसपान कर लोग आज भी अनन्त आनन्द का अनुभव करते है।
कन्नड एक द्रविड़ भाषा होने पर भी संस्कृत भाषा तथा साहित्य से अधिक प्रभावित हुई है। उसके प्रारंभिक विकास सकत के संगम में ही हुआ है।
कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने भी कन्नड़ वर्णमाला पढ़ाने के सचित्र तरीके के बारे में किरण कुमार एस के एक ट्वीट का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया था : “भाषा सीखने की प्रक्रिया को एक मनोरंजक गतिविधि बनाने का एक रचनात्मक तरीका, यहां संदर्भ सुन्दर कन्नड़ भाषा का।”
