मणिपुर हिंसा: उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश, जानिए पूरा मामला क्या है

मणिपुर में आदिवासियों और बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के बीच हिंसा भड़कने के बाद हालात काबू करने के लिए सेना और असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है। सरकार ने गंभीर स्थिति में उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। राज्य के आठ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि नगा और कुकी आदिवासियों के आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद बुधवार को हिंसा भड़की, जो रात में और तेज हो गई। 9,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वह राज्य की आबादी में 53 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार हफ्ते में केंद्र को सिफारिश भेजे। इसके बाद एसटी दर्जे की मांग के खिलाफ चुराचांदपुर जिले में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर ने आदिवासी एकजुटता मार्च का आयोजन किया था। पुलिस के अनुसार, मार्च के दौरान हथियारबंद भीड़ ने कथित तौर पर मैतेई समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में भी हमले हुए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा भड़क गई। दुकानों और घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। मणिपुर में हिंसा क्यों भड़की, हिंसा के पीछे क्या कारण है और कैसे मणिपुर जल उठा? जानें हर सवालों के जवाब…

क्यों बने ऐसे हालात?

मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय अपने लिए लंबे समय से एसटी दर्जे की मांग कर रहा है। हाल ही में हाई कोर्ट ने भी एक तरह से उनकी मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह इस बारे में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे। यही नहीं राज्य के जंगलात के इलाके चूड़ाचांदपुर में बसे 38 गांवों को राज्य सरकार अवैध बसावट बताते हुए खाली करवा रही है। इस मुद्दे पर पिछले हफ्ते चूड़ाचांदपुर में हिंसा भी हुई थी। इसी सबके विरोध में बुधवार को जनजातियों ने मार्च निकाला था, जिस दौरान हिंसा भड़क उठी।

एसटी स्टेटस क्यों चाहते हैं मेईती?

यह मांग साल 2012 से जोर पकड़ रही है। इसे मुख्यतौर पर शेड्यूल्ड ट्राइब्स डिमांड कमिटी ऑफ मणिपुर (STDCM) उठाती रही है। असल में साल 1949 में मणिपुर के भारत में शामिल होने से पहले तक मेती को जनजाति माना जाता था। भारत में मिलने के बाद यह दर्जा छिन गया। हाल ही में हाई कोर्ट में जब एसटी का दर्जा देने का मामला उठा तो दलील दी गई कि मैती समुदाय की पैतृक भूमि, परंपराओं, संस्कृति और भाषा की रक्षा के लिए एसटी का दर्जा दिया जाना जरूरी है।

हिंसा के बाद कितने बदले हालात

9000 लोगों को घरों को छोड़ सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। 500 से अधिक लोग इंफाल पश्चिम में अपने घरों से भाग गए हैं। इंफाल घाटी में बुधवार रात कुछ पूजा स्थलों को भी आग लगाई गई। कांगपोकपी जिले के मोटबंग में बीस से अधिक घर जलकर खाक हो गए हैं। 5 दिन तक राज्य में मोबाइल इंटरनेट बैन कर दिया गया है।

Vipin Srivastava
Vipin Srivastava
journalist, writer @jankibaat1

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