लोक सभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी और मोदी सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है। हालांकि राहुल गांधी पहले की तरह ही वही पुरानी बातें करते नजर आए। इसी मुद्दे को लेकर समाचार चैनल आज तक पर बहस हो रही थी जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सहसंयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी मौजूद थे।
प्रदीप भंडारी ने कहा, “देखिए, राहुल गांधी तीन बड़ी बातें कह रहे हैं। वो कह रहे हैं—एक तो कि एंटी-इंकमबेंसी हवा ही हो गई है आप लोगों के आने के बाद। दूसरी बात, वो कह रहे हैं कि पीएम और गृह मंत्री की जांच हो, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो, उन्हें वो देशद्रोही बता रहे हैं। जो जनता के कटघरे में देशद्रोही घोषित है, वो दूसरों को देशद्रोही का सर्टिफिकेट जब बांटते हैं, तो जनता वापस से इनको देशद्रोही जो है चुनाव के अंदर घोषित करती है। इससे विपक्ष में बैठते हैं। मैं फैक्ट्स में बात करूंगा।”
प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, “इन्होंने बोला एंटी-इंकमबेंसी हो नहीं सकती। जवाहरलाल नेहरू 1952, 57, 1962, पवन कुमार चामलिंग 1994, 99, 2004, 2009, नवीन पटनायक 2000, 2004, 2009, 2014, 2019, ज्योति बसु 1977, 82, 87, 91, 96, ऐसे तमाम हमारे पास उदाहरण हैं, जहां पे लोग वापस से आए हैं। दूसरी बात कहना चाहता हूं, राहुल गांधी यहां पे बड़ी-बड़ी बातें इलेक्शन कमीशन के बारे में कर रहे हैं। मेरे पास 1 फरवरी 2009 का है जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर गोपालस्वामी ने प्रेसिडेंट को लिखा था कि कांग्रेस पार्टी के समय के नवीन चावला को बर्खास्त कर देना चाहिए। यहां पे डिसेंट नोट की बात नहीं, बर्खास्त की बात है। इसको बर्खास्त नहीं किया गया था मैडम, इसको बर्खास्त करने के बजाय इनको प्रमोट करके चीफ इलेक्शन कमिश्नर बना दिया गया था नवीन चावला को और कांग्रेस पार्टी सरकार जीत गई। 324 आर्टिकल से एक ही बात, कहना चाहूंगा कि 324 आर्टिकल ये कहता है कि चुनाव आयोग का कोई भी मेजॉरिटी ऑफ देयर ओन ओपिनियन होता है, तो आप मान लीजिए बीच में डिस्कशन होगा, डिफरेंस होगा, ऐसे में मेजॉरिटी कंसेंसस से फैसला होगा।”
प्रदीप भंडारी ने कहा कि तो ये क्या है? एक चुनाव, कटघरे में जब जनता का विश्वास नहीं जीत पा रहे, तो अविश्वास पैदा करना चाहते हैं, जनता इनकी पुरानी स्क्रिप्ट को देख ले।
