विपक्षी दल लोकतंत्र नहीं परिवारवादी राजनीति को बचाने के लिए लड़ रहे- बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी

बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सहसंयोजक और प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के विरोध के पीछे लोकतंत्र बचाने की चिंता नहीं, बल्कि राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के करियर को सुरक्षित रखने की कोशिश है। एक टीवी कार्यक्रम के दौरान प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस, गांधी परिवार, शरद पवार परिवार, लालू यादव परिवार, उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि उन्हें एक तस्वीर भेजी गई, जिसके आधार पर उन्होंने विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, कांग्रेस सोनिया गांधी, राहुल गांधी के राजनीतिक करियर को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। इसी तरह शरद पवार सुप्रिया सुले, लालू यादव तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे तथा ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।

प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल लोकतंत्र बचाने के नाम पर अपने-अपने राजनीतिक परिवारों के हितों की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां वास्तव में प्रक्रिया से जुड़ी हैं, तो उसे अलग-अलग राज्यों में भी समान रूप से विरोध दर्ज कराना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता ने पंजाब में SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वहां प्रक्रिया पूरी होने के दौरान इन दलों ने वैसा विरोध नहीं किया, जैसा दूसरे स्थानों पर देखने को मिल रहा है।

प्रदीप भंडारी ने सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की आपत्तियां गंभीर हैं, तो पंजाब में प्रक्रिया के दौरान भी उसी तरह विरोध क्यों नहीं किया गया? उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों में विपक्ष के रुख का अंतर उसके आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

प्रदीप भंडारी ने SIR से जुड़े मामले के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब मामला अदालत में है, तो अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। प्रदीप भंडारी ने सुझाव दिया कि विपक्षी नेताओं से यह स्पष्ट कराया जाना चाहिए कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष अपने आरोपों को लेकर आश्वस्त है, तो उसे अदालत के निर्णय का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए।उन्होंने आगे चुनौती देते हुए कहा कि यदि विपक्ष को अपने आरोपों पर इतना ही भरोसा है, तो उसके मुख्यमंत्री इस्तीफा देकर अपनी बात की गंभीरता साबित करें।

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के सार्वजनिक व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए उनके कुछ कथित घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के साथ राहुल गांधी के व्यवहार, एक पत्रकार को धक्का दिए जाने के कथित मामले और प्रियंका गांधी से जुड़े एक वीडियो का हवाला दिया। प्रदीप भंडारी ने इन घटनाओं को राहुल गांधी के व्यक्तित्व और व्यवहार से जोड़ते हुए उनकी आलोचना की। उन्होंने 2013 में एक पत्रकार द्वारा राहुल गांधी के बारे में लिखी गई टिप्पणी का भी उल्लेख किया और अंग्रेजी में एक कथित उद्धरण पढ़ा, जिसमें राहुल गांधी की भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक समस्याओं को लेकर टिप्पणी की गई थी।

प्रदीप भंडारी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और SIR से जुड़े विवाद के संदर्भ में सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन है, तो विपक्ष की आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए। प्रदीप भंडारी का तर्क था कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित विवादों का समाधान संवैधानिक और न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से होना चाहिए।

प्रदीप भंडारी ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया और मांग की कि विपक्ष अपने दावों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाए तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का सम्मान करे।

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